अयोध्याकाण्ड

अध्याय 132: वाल्मीकि ने चित्रकूट का मार्ग बताया

5 श्लोक · 132 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

वाल्मीकि ने चित्रकूट का मार्ग बताया

इस प्रकार मुनि ने प्रभु को उनके सच्चे निवास दिखाए और उनके प्रेमभरे वचन श्रीराम को भाए। फिर मुनि बोले, हे सूर्यकुलनायक, अब इस समय के लिए सुखद आश्रम बताता हूँ। आप चित्रकूट पर्वत पर रहिए, वहाँ सब प्रकार सुविधा है। पर्वत और वन सुन्दर हैं, जहाँ हाथी, सिंह, हिरन और पक्षी विहार करते हैं। वहाँ पुराणों में वर्णित पवित्र नदी है जिसे अत्रि की पत्नी अपने तपोबल से लाईं; वह गंगा की धारा मन्दाकिनी है जो सब पापों को खा जाती है। अत्रि आदि अनेक मुनि वहाँ योग, जप और तप करते हैं। चलकर उनका परिश्रम सफल कीजिए और पर्वत को गौरव दीजिए। महामुनि ने चित्रकूट की अपार महिमा गाई, और दोनों भाई सीता सहित उस नदी में स्नान करने आए।

132.1

एहि-बिधि मुनिबर भवन देखाये । बचन सप्रेम राम मन भाये ॥
कह मुनि सुनहु-भानुकुलनायक । आस्रम कहउँ समय-सुख-दायक ॥

ehi-bidhi munibara bhavana dekhāye | bacana saprema rāma mana bhāye ||
kaha muni sunahu-bhānukulanāyaka | āsrama kahaum̐ samaya-sukha-dāyaka ||

132.2

चित्रकूट गिरि करहु निवासू । तहँ तुम्हार सब भाँति सुपासू ॥
सैलु सुहावन कानन चारू । करि केहरि मृग बिहग बिहारू ॥

citrakūṭa giri karahu nivāsū | taham̐ tumhāra saba bhām̐ti supāsū ||
sailu suhāvana kānana cārū | kari kehari mṛga bihaga bihārū ||

132.3

नदी पुनीत पुरान बखानी । अत्रि-प्रिया निज तप-बल आनी ॥
सुरसरि-धार नाउँ मन्दाकिनि । जो सब पातक-पोतक-डाकिनि ॥

nadī punīta purāna bakhānī | atri-priyā nija tapa-bala ānī ||
surasari-dhāra nāum̐ mandākini | jo saba pātaka-potaka-ḍākini ||

132.4

अत्रि आदि मुनिवर बहु बसहीं । करहिं जोग जप तप तन कसहीं ॥
चलहु सफल श्रम सब कर करहू । राम देहु गौरव गिरिवरहू ॥

atri ādi munivara bahu basahīṃ | karahiṃ joga japa tapa tana kasahīṃ ||
calahu saphala śrama saba kara karahū | rāma dehu gaurava girivarahū ||

दो॰ 132दोहा

चित्रकूट महिमा अमित, कहीं महामुनि गाइ ।
आए नहाने सरित-बर, सिय समेत दोउ भाइ ॥

citrakūṭa mahimā amita, kahīṃ mahāmuni gāi |
āe nahāne sarita-bara, siya sameta dou bhāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0