अयोध्याकाण्ड

अध्याय 12: सरस्वती ने मन्थरा की बुद्धि फेरी

5 श्लोक · 12 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

सरस्वती ने मन्थरा की बुद्धि फेरी

देवताओं की विनती सुनकर सरस्वती खड़ी पछताने लगीं कि मैं कमलवन के लिए पाले की रात बनूँगी। उन्हें देखकर देवता फिर निहोरा करते हैं: माता, आपको तनिक भी दोष नहीं लगेगा। रघुराज हर्ष और विषाद से परे हैं, आप श्रीराम का प्रभाव जानती हैं। जीव अपने कर्मवश सुख-दुःख भोगता है, देवताओं के हित के लिए अवध जाइए। बार-बार चरण पकड़ने पर वे सकुचाती हुई चलीं, यह सोचती हुई कि देवताओं की बुद्धि ओछी है, ऊँचा निवास और नीची करनी, दूसरे का वैभव देख नहीं सकते। फिर आगे के काम का विचार करके कि श्रेष्ठ कवि मेरी चाह करेंगे, वे हर्ष से दशरथ की पुरी में ऐसे आईं मानो दुःसह दुःख देने वाली ग्रहदशा हो। कैकेयी की मन्दबुद्धि दासी मन्थरा को अपयश की पिटारी बनाकर, उसकी बुद्धि फेरकर, वे चली गईं।

12.1

सुनि सुर बिनय ठाढि पछिताती । भइउँ सरोज-बिपिन हिम-राती ॥
देखि देव पुनि कहहिँ निहोरी । मातु तोहि नहिँ थोरिउ खोरी ॥

suni sura binaya ṭhāḍhi pachitātī | bhaium̐ saroja-bipina hima-rātī ||
dekhi deva puni kahahim̐ nihorī | mātu tohi nahim̐ thoriu khorī ||

12.2

बिसमय हरष रहित रघुराऊ । तुम्ह जानहु सब राम प्रभाऊ ॥
जीव करम-बस सुख-दुख-भागी । जाइअ अवध देव-हित-लागी ॥

bisamaya haraṣa rahita raghurāū | tumha jānahu saba rāma prabhāū ||
jīva karama-basa sukha-dukha-bhāgī | jāia avadha deva-hita-lāgī ||

12.3

बार बार गहि चरन सँकोचौ । चली बिचारि बिबुध-मति-पोची ॥
ऊँच निवास नीचि करतूती । देखि न सकहिँ पराइ बिभूती ॥

bāra bāra gahi carana sam̐kocau | calī bicāri bibudha-mati-pocī ||
ūm̐ca nivāsa nīci karatūtī | dekhi na sakahim̐ parāi bibhūtī ||

12.4

आगिल काज बिचारि बहोरी । करहहिं चाह कुसल-कबि मोरी ॥
हरषि हृदयँ दसरथ-पुर आई । जनु ग्रह दसा दुसह दुखदाई ॥

āgila kāja bicāri bahorī | karahahiṃ cāha kusala-kabi morī ||
haraṣi hṛdayam̐ dasaratha-pura āī | janu graha dasā dusaha dukhadāī ||

दो॰ 12दोहा

नाम मन्थरा मन्द-मति, चेरी कैकेइ केरि ।
अजस पेटारी ताहि करि, गई गिरा मति फेरि ॥

nāma mantharā manda-mati, cerī kaikei keri |
ajasa peṭārī tāhi kari, gaī girā mati pheri ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0