अयोध्याकाण्ड

अध्याय 11: नगर की प्रतीक्षा और देवताओं की चाल

5 श्लोक · 11 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

नगर की प्रतीक्षा और देवताओं की चाल

अनेक प्रकार के बाजे बज रहे हैं, नगर का आनन्द कहा नहीं जाता। सब भरत के आने की मनौती करते हैं कि वे शीघ्र आएँ और नेत्रों का फल पाएँ। बाज़ार, रास्ते, घर, गली और चौपालों में लोग आपस में कहते हैं कि कल का शुभ लग्न कितनी देर में है, कब विधाता हमारी अभिलाषा पूरी करेगा और सीता सहित श्रीराम सोने के सिंहासन पर बैठेंगे। सब कहते हैं कि कल कब होगा। उधर कुचाली देवता विघ्न मना रहे हैं। उन्हें अवध की बधाई वैसे ही नहीं सुहाती जैसे चोर को चाँदनी रात नहीं भाती। देवता सरस्वती को बुलाकर विनती करते हैं और बार-बार उनके पैरों पड़ते हैं: माता, हमारी बड़ी विपत्ति देखकर आज वही कीजिए जिससे श्रीराम राज्य छोड़कर वन जाएँ और देवताओं का काम बने।

11.1

बाजहिँ बाजन बिबिध विधाना । पुर-प्रमोद नहिँ जाइ बखाना ॥
भरत आगमन सकल मनावहिँ । आवहु बेगि नयन फल पावहिँ ॥

bājahim̐ bājana bibidha vidhānā | pura-pramoda nahim̐ jāi bakhānā ||
bharata āgamana sakala manāvahim̐ | āvahu begi nayana phala pāvahim̐ ||

11.2

हाट बाट घर गलीं अथाई । कहहिँ परसपर लोग लोगाई ॥
कालि लगन भलि केतिक बारा । पूजिहि बिधि अभिलाष हमारा ॥

hāṭa bāṭa ghara galīṃ athāī | kahahim̐ parasapara loga logāī ||
kāli lagana bhali ketika bārā | pūjihi bidhi abhilāṣa hamārā ||

11.3

कनक सिँघासन सीय समेता । बैठहिँ राम होइ चित चेता ॥
सकल कहहिँ कब होइहि काली । बिघन मनावहिं देव कुचाली ॥

kanaka sim̐ghāsana sīya sametā | baiṭhahim̐ rāma hoi cita cetā ||
sakala kahahim̐ kaba hoihi kālī | bighana manāvahiṃ deva kucālī ||

11.4

तिन्हहिँ सोहाइ न अवध बधावा । चोरहि चन्दिनि-राति न भावा ॥
सारद बोलि बिनय सुर करहीँ । बारहिँ बार पाय लै परहीँ ॥

tinhahim̐ sohāi na avadha badhāvā | corahi candini-rāti na bhāvā ||
sārada boli binaya sura karahīm̐ | bārahim̐ bāra pāya lai parahīm̐ ||

दो॰ 11दोहा

बिपत्ति हमारि बिलोकि बड़ि, मातु करिय सोइ आजु ।
राम जाहिँ बन राज तजि, होइ सकल सुर काज ॥

bipatti hamāri biloki bar̤i, mātu kariya soi āju |
rāma jāhim̐ bana rāja taji, hoi sakala sura kāja ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0