अयोध्याकाण्ड

अध्याय 118: सीता का स्नेह और लोगों का मार्ग बताना

5 श्लोक · 118 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

सीता का स्नेह और लोगों का मार्ग बताना

स्त्रियाँ आशीर्वाद देती हैं कि पार्वती के समान पति की प्यारी बनो, और हे देवी, हम पर से अपना स्नेह न छोड़ना। हाथ जोड़कर वे बार बार विनती करती हैं कि यदि इस मार्ग से लौटें तो हमें अपनी दासी जानकर दर्शन देना। सीता ने मधुर वचन कहकर उन्हें ऐसे सन्तुष्ट किया जैसे चाँदनी कुमुदिनी को पोषती है। तभी लक्ष्मण ने रघुबर का रुख जानकर कोमल वाणी से लोगों से मार्ग पूछा। सुनते ही लोगों का आनन्द मिट गया, मानो विधाता दी हुई निधि छीने ले रहा हो। कर्म की गति समझकर उन्होंने धीरज धरा और सुगम मार्ग खोजकर बता दिया। तब लक्ष्मण और जानकी सहित रघुनाथ चल पड़े, प्रिय वचन कहकर सबको लौटाया, पर उनके मन साथ ले गए।

118.1

पारबती सम पति प्रिय होहू । देबि न हम पर छाड़ब छोहू ॥
पुनि पुनि बिनय करिय कर जोरी । जौं एहि मारग फिरिअ बहोरी ॥

pārabatī sama pati priya hohū | debi na hama para chār̤aba chohū ||
puni puni binaya kariya kara jorī | jauṃ ehi māraga phiria bahorī ||

118.2

दरसन देव जानि निज-दासी । लखीं सीयँ सब प्रेम-पिआसी ॥
मधुर बचन कहि कहि परितोषीं । जनु कुमुदिनीं कौमुदीं पोषीं ॥

darasana deva jāni nija-dāsī | lakhīṃ sīyam̐ saba prema-piāsī ||
madhura bacana kahi kahi paritoṣīṃ | janu kumudinīṃ kaumudīṃ poṣīṃ ||

118.3

तबहिं लखन रघुबर रुख जानी । पूछेउ मग लोगन्हि मृदु बानी ॥
सुनत नारि-नर भये दुखारी । पुलकित गात बिलोचन बारी ॥

tabahiṃ lakhana raghubara rukha jānī | pūcheu maga loganhi mṛdu bānī ||
sunata nāri-nara bhaye dukhārī | pulakita gāta bilocana bārī ||

118.4

मिटा मोद मन भये मलीने । विधि निधि दीन्ह लेत जनु छीने ॥
समुझि करम-गति धीरज कीन्हा । सोधि सुगम मगु तिन्ह कहि दीन्हा ॥

miṭā moda mana bhaye malīne | vidhi nidhi dīnha leta janu chīne ||
samujhi karama-gati dhīraja kīnhā | sodhi sugama magu tinha kahi dīnhā ||

दो॰ 118दोहा

लखन-जानकी-सहित तब, गवन कीन्ह रघुनाथ ।
फेरे सब प्रिय बचन कहि, लिये लाइ मन साथ ॥

lakhana-jānakī-sahita taba, gavana kīnha raghunātha |
phere saba priya bacana kahi, liye lāi mana sātha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0