कोटि मनोज लजावनिहारे । सुमुखि कहहु को आहिं तुम्हारे ॥
सुनि सनेहमय मञ्जुल-बानी । सकुची सिय मन महँ मुसुकानी ॥
koṭi manoja lajāvanihāre | sumukhi kahahu ko āhiṃ tumhāre ||
suni sanehamaya mañjula-bānī | sakucī siya mana maham̐ musukānī ||
5 श्लोक · 117 में से 326
स्त्रियाँ पूछती हैं, हे सुमुखी, करोड़ों कामदेवों को लजाने वाले ये दोनों तुम्हारे कौन हैं? उनकी स्नेह भरी मधुर वाणी सुनकर सीता सकुचा गईं और मन में मुस्कुराईं। वे उन्हें देखकर फिर धरती की ओर देखती हैं, दोनों ओर के संकोच से सकुची हुई हैं। फिर वे मधुर वचन बोलीं, ये जो सहज स्वभाव वाले, गोरे शरीर के हैं, इनका नाम लक्ष्मण है, ये मेरे छोटे देवर हैं। फिर आँचल से चन्द्रमुख ढककर, प्रियतम की ओर देखकर, भौंहें टेढ़ी करके, खंजन जैसी सुन्दर तिरछी आँखों के इशारे से उन्होंने बता दिया कि ये मेरे पति हैं। सब ग्रामवधुएँ ऐसी प्रसन्न हुईं मानो कंगालों ने राजा का खजाना लूट लिया हो। वे पाँव पड़कर आशीर्वाद देती हैं, जब तक पृथ्वी शेषनाग के सिर पर है, तुम सदा सुहागिन रहो।
कोटि मनोज लजावनिहारे । सुमुखि कहहु को आहिं तुम्हारे ॥
सुनि सनेहमय मञ्जुल-बानी । सकुची सिय मन महँ मुसुकानी ॥
koṭi manoja lajāvanihāre | sumukhi kahahu ko āhiṃ tumhāre ||
suni sanehamaya mañjula-bānī | sakucī siya mana maham̐ musukānī ||
तिन्हहिँ बिलोकि बिलोकति धरनी । दुहुँ सकोच सकुचित बरबरनी ॥
सकुचि सप्रेम बाल मृग नयनी । बोली मधुर बचन पिकबयनी ॥
tinhahim̐ biloki bilokati dharanī | duhum̐ sakoca sakucita barabaranī ||
sakuci saprema bāla mṛga nayanī | bolī madhura bacana pikabayanī ||
सहज सुभाय सुभग तन गोरे । नाम लखन लघु देवर मोरे ॥
बहुरि बदन-बिधु अञ्चल ढाँकी । पिय-तन चितइ भौंह करि बाँकी ॥
sahaja subhāya subhaga tana gore | nāma lakhana laghu devara more ||
bahuri badana-bidhu añcala ḍhām̐kī | piya-tana citai bhauṃha kari bām̐kī ||
खंजन मञ्जु तिरीछे नयननि । निज पति कहेउ तिन्हहि सियँ सयननि ॥
भई मुदित सब ग्रामबधूटीं । रङ्कन्ह राय-रासि जनु लूटीं ॥
khaṃjana mañju tirīche nayanani | nija pati kaheu tinhahi siyam̐ sayanani ||
bhaī mudita saba grāmabadhūṭīṃ | raṅkanha rāya-rāsi janu lūṭīṃ ||
अति सप्रेम सिय पायँ परि, बहु बिधि देहिँ असीस ।
सदा सोहागिनि होहु तुम्ह, जब लगि महि अहि-सीस ॥
ati saprema siya pāyam̐ pari, bahu bidhi dehim̐ asīsa |
sadā sohāgini hohu tumha, jaba lagi mahi ahi-sīsa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0