फिरत नारि-नर अति पछि ताहीं । देअहि, दोष देहिँ मन माहीं ॥
सहित बिषाद परसपर कहहीं । बिधि करतब उलटे सब अहहीँ ॥
phirata nāri-nara ati pachi tāhīṃ | deahi, doṣa dehim̐ mana māhīṃ ||
sahita biṣāda parasapara kahahīṃ | bidhi karataba ulaṭe saba ahahīm̐ ||
5 श्लोक · 119 में से 326
लौटते लोग दैव को दोष देते हुए आपस में कहते हैं कि विधाता के सब काम उलटे हैं। वह बिल्कुल निरंकुश, निठुर और निडर है, जिसने चन्द्रमा को रोगी और कलंकी बनाया, कल्पवृक्ष को पेड़ और समुद्र को खारा बनाया, उसी ने राजकुमारों को वन भेजा। यदि इन्हें वनवास दिया तो विधाता ने भोग विलास व्यर्थ बनाए। यदि ये बिना जूतों के मार्ग में चलते हैं तो अनेक वाहन व्यर्थ रचे। यदि ये कुश और पत्ते बिछाकर धरती पर सोते हैं तो विधाता सुन्दर सेज क्यों बनाता है? यदि ये अत्यन्त सुन्दर और सुकुमार मुनियों के वस्त्र और जटा धारण करते हैं तो कर्तार ने नाना प्रकार के गहने और कपड़े व्यर्थ बनाए।
फिरत नारि-नर अति पछि ताहीं । देअहि, दोष देहिँ मन माहीं ॥
सहित बिषाद परसपर कहहीं । बिधि करतब उलटे सब अहहीँ ॥
phirata nāri-nara ati pachi tāhīṃ | deahi, doṣa dehim̐ mana māhīṃ ||
sahita biṣāda parasapara kahahīṃ | bidhi karataba ulaṭe saba ahahīm̐ ||
निपट निरङ्कुस निठुर निसंकू । जेहिं ससि कीन्ह सरुज सकलंकू ॥
रूख-कलपतरु सागर खारा । तेहिं पठये बन राजकुमारा ॥
nipaṭa niraṅkusa niṭhura nisaṃkū | jehiṃ sasi kīnha saruja sakalaṃkū ||
rūkha-kalapataru sāgara khārā | tehiṃ paṭhaye bana rājakumārā ||
जौं पै इन्हहिँ दीन्ह बनबासू । कीन्हि बादि बिधि भोग-बिलासू ॥
ये बिचरहिँ मग बिनु पदत्राना । रचे बादि बिधि बाहन नाना ॥
jauṃ pai inhahim̐ dīnha banabāsū | kīnhi bādi bidhi bhoga-bilāsū ||
ye bicarahim̐ maga binu padatrānā | race bādi bidhi bāhana nānā ||
ये महि परहिँ डासि कुस पाता । सुभग-सेज कत सृजत बिधाता ॥
तरुबर-बास इन्हहिँ बिधि दीन्हा । धवल-धाम रचि रचि श्रमु कीन्हा ॥
ye mahi parahim̐ ḍāsi kusa pātā | subhaga-seja kata sṛjata bidhātā ||
tarubara-bāsa inhahim̐ bidhi dīnhā | dhavala-dhāma raci raci śramu kīnhā ||
जी ये मुनि-पट-धर जटिल, सुन्दर सुठि सुकुमार ।
बिबिध भाँति भूषन बसन, बादि किये करतार ॥
jī ye muni-paṭa-dhara jaṭila, sundara suṭhi sukumāra |
bibidha bhām̐ti bhūṣana basana, bādi kiye karatāra ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0