बरनि न जाइ मनोहर जोरी । सोभा बहुत थोरि मति मोरी ॥
राम लखन सिय सुन्दरताई । सब चितवहिँ चित मन मति लाई ॥
barani na jāi manohara jorī | sobhā bahuta thori mati morī ||
rāma lakhana siya sundaratāī | saba citavahim̐ cita mana mati lāī ||
5 श्लोक · 116 में से 326
तुलसीदास कहते हैं, वह मनोहर जोड़ी वर्णन नहीं की जा सकती, शोभा बहुत है और मेरी बुद्धि थोड़ी। प्रेम के प्यासे नर नारी ऐसे ठिठक गए हैं जैसे दीपक देखकर हिरन और हिरनी ठहर जाते हैं। गाँव की स्त्रियाँ सीता के पास जाती हैं, पर अत्यन्त स्नेह होने पर भी पूछने में सकुचाती हैं। वे बार बार पाँव छूती हैं और सहज भाव से कोमल वचन कहती हैं। हे राजकुमारी, हम विनती करती हैं, पर स्त्री स्वभाव से कुछ पूछते डरती हैं। हम गँवारों की ढिठाई क्षमा करना। ये दोनों राजकुमार स्वभाव से ही सलोने हैं, मरकत और सोने ने इन्हीं से कान्ति पाई है। एक साँवले, एक गोरे, सुन्दर किशोर, शोभा के घर, शरद के चन्द्रमा जैसे मुख और शरद कमल जैसे नेत्र।
बरनि न जाइ मनोहर जोरी । सोभा बहुत थोरि मति मोरी ॥
राम लखन सिय सुन्दरताई । सब चितवहिँ चित मन मति लाई ॥
barani na jāi manohara jorī | sobhā bahuta thori mati morī ||
rāma lakhana siya sundaratāī | saba citavahim̐ cita mana mati lāī ||
थके नारि नर प्रेम पिआसे । मनहुँ मृगी मृग देखि दिआ से ॥
सीय समीप ग्रामतिय जाहीँ । पूछत अति सनेहँ सकुचाहीं ॥
thake nāri nara prema piāse | manahum̐ mṛgī mṛga dekhi diā se ||
sīya samīpa grāmatiya jāhīm̐ | pūchata ati saneham̐ sakucāhīṃ ||
बार बार सब लागहिँ पाये । कहहिँ बचन मृदु सरल सुभाये ॥
राजकुमारि बिनय हम करहीँ । तिय-सुभायँ कछु पूछत डरहीं ॥
bāra bāra saba lāgahim̐ pāye | kahahim̐ bacana mṛdu sarala subhāye ||
rājakumāri binaya hama karahīm̐ | tiya-subhāyam̐ kachu pūchata ḍarahīṃ ||
स्वामिनि अबिनय छमबि हमारी । बिलगु न मानब जानि गवाँरी ॥
राजकुअँर दोउ सहज सलोने । इन्ह तेँ लही दुति मरकत सोने ॥
svāmini abinaya chamabi hamārī | bilagu na mānaba jāni gavām̐rī ||
rājakuam̐ra dou sahaja salone | inha tem̐ lahī duti marakata sone ||
स्यामल गौर किसोर बर, सुन्दर सुषमा ऐन ।
सरद सर्बरीनाथ-मुख, सरद-सरोरुह-नयन ॥
syāmala gaura kisora bara, sundara suṣamā aina |
sarada sarbarīnātha-mukha, sarada-saroruha-nayana ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0