एक कलस भरि आनहिँ पानी । अँचइअ नाथ कहहिँ मृदु बानी ॥
सुनि प्रिय बचन प्रीति अति देखी । राम कृपाल सुसील बिसेषी ॥
eka kalasa bhari ānahim̐ pānī | am̐caia nātha kahahim̐ mṛdu bānī ||
suni priya bacana prīti ati dekhī | rāma kṛpāla susīla biseṣī ||
5 श्लोक · 115 में से 326
कोई घड़े में पानी भर लाता है और कोमल वाणी से कहता है, नाथ, आचमन कीजिए। प्रीति देखकर और सीता को थका जानकर कृपालु राम ने घड़ी भर बरगद की छाँह में विश्राम किया। वे चारों ओर मुखचन्द्र के चकोर बने खड़े हैं। प्रभु का शरीर नए तमाल के रंग का है, जिसे देखकर करोड़ों कामदेव मोहित हो जाएँ। बिजली के रंग वाले लक्ष्मण नख से शिख तक सुन्दर और मन को भाने वाले हैं। दोनों कमर में मुनियों के वस्त्र और तरकश कसे हैं, कमल जैसे हाथों में धनुष बाण हैं। सिर पर जटाओं का मुकुट है, छाती, भुजाएँ और नेत्र विशाल हैं, शरद पूर्णिमा के चन्द्रमा जैसे मुख पर पसीने की बूँदें झलक रही हैं।
एक कलस भरि आनहिँ पानी । अँचइअ नाथ कहहिँ मृदु बानी ॥
सुनि प्रिय बचन प्रीति अति देखी । राम कृपाल सुसील बिसेषी ॥
eka kalasa bhari ānahim̐ pānī | am̐caia nātha kahahim̐ mṛdu bānī ||
suni priya bacana prīti ati dekhī | rāma kṛpāla susīla biseṣī ||
जानी श्रमित सीय मन माहीं । घरिक बिलम्ब कीन्ह बट-छाहीं ॥
मुदित नारि नर देखहिँ सोभा । रूप अनूप नयन मन लोभा ॥
jānī śramita sīya mana māhīṃ | gharika bilamba kīnha baṭa-chāhīṃ ||
mudita nāri nara dekhahim̐ sobhā | rūpa anūpa nayana mana lobhā ||
एकटक-टक सोहहिं चहुँ ओरा । रामचन्द्र-मुख-चन्द चकोरा ॥
तरुन-तमाल-बरन तनु सोहा । देखत कोटि मदन मन मोहा ॥
ekaṭaka-ṭaka sohahiṃ cahum̐ orā | rāmacandra-mukha-canda cakorā ||
taruna-tamāla-barana tanu sohā | dekhata koṭi madana mana mohā ||
दामिनि-बरन लखन सुठि नीके । नख सिख सुभग भावते जी के ॥
मुनि-पट कटिन्ह कसें तूनीरा । सोहहिं कर-कमलिनि धनु तीरा ॥
dāmini-barana lakhana suṭhi nīke | nakha sikha subhaga bhāvate jī ke ||
muni-paṭa kaṭinha kaseṃ tūnīrā | sohahiṃ kara-kamalini dhanu tīrā ||
जटा मुकुट सीसनि सुभग, उर-भुज-नयन-बिसाल ।
सरद-परब-बिधु-बदन बर, लसत स्वेद-कन-जाल ॥
jaṭā mukuṭa sīsani subhaga, ura-bhuja-nayana-bisāla |
sarada-paraba-bidhu-badana bara, lasata sveda-kana-jāla ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0