पुनि सियँ-राम-लखन कर जोरी । जमुनहि कीन्ह प्रनाम बहोरी ॥
चले ससीय मुदित दोउ भाई । रबितनुजा कइ करत बड़ाई ॥
puni siyam̐-rāma-lakhana kara jorī | jamunahi kīnha pranāma bahorī ||
cale sasīya mudita dou bhāī | rabitanujā kai karata bar̤āī ||
5 श्लोक · 112 में से 326
फिर सीता, राम और लक्ष्मण ने हाथ जोड़कर यमुना को प्रणाम किया, और सीता सहित दोनों भाई सूर्यपुत्री की बड़ाई करते हुए प्रसन्न होकर चले। मार्ग में अनेक पथिक मिलते हैं और दोनों भाइयों को देखकर प्रेम से कहते हैं। तुम्हारे सब अंगों में राजचिह्न हैं, तुम्हें पैदल चलते देखकर हमारे हृदय में बड़ा सोच है, हमें तो ज्योतिष झूठा लगता है। मार्ग दुर्गम है, भारी पहाड़ और वन हैं, और साथ में सुकुमारी स्त्री है। हाथी और सिंहों से भरा वन देखा भी नहीं जाता। आज्ञा हो तो हम साथ चलें, जहाँ तक जाना है वहाँ पहुँचाकर तुम्हें सिर नवाकर लौट आएँगे। इस प्रकार प्रेम के वश, पुलकित शरीर और भीगे नेत्रों से वे पूछते हैं, और कृपासिन्धु विनम्र कोमल वचन कहकर उन्हें लौटा देते हैं।
पुनि सियँ-राम-लखन कर जोरी । जमुनहि कीन्ह प्रनाम बहोरी ॥
चले ससीय मुदित दोउ भाई । रबितनुजा कइ करत बड़ाई ॥
puni siyam̐-rāma-lakhana kara jorī | jamunahi kīnha pranāma bahorī ||
cale sasīya mudita dou bhāī | rabitanujā kai karata bar̤āī ||
पथिक अनेक मिलहिँ मग जाता । कहहिँ सप्रेम देखि दोउ भ्राता ॥
राज-लखन सब अङ्ग तुम्हारें । देखि सोच अति हृदय हमारें ॥
pathika aneka milahim̐ maga jātā | kahahim̐ saprema dekhi dou bhrātā ||
rāja-lakhana saba aṅga tumhāreṃ | dekhi soca ati hṛdaya hamāreṃ ||
मारग चलहु पयादेहि पाये । ज्योतिष झूठ हमारें भाएँ ॥
अगम पन्थ गिरि कानन भारी । तेहि महँ साथ नारि सुकुमारी ॥
māraga calahu payādehi pāye | jyotiṣa jhūṭha hamāreṃ bhāem̐ ||
agama pantha giri kānana bhārī | tehi maham̐ sātha nāri sukumārī ||
करि केहरि बन जाइ न जोई । हम सँग चलहिं जो आयसु होई ॥
जाब जहाँ लगि तहँ पहुँचाई । फिरब बहोरि तुम्हहिँ सिर नाई ॥
kari kehari bana jāi na joī | hama sam̐ga calahiṃ jo āyasu hoī ||
jāba jahām̐ lagi taham̐ pahum̐cāī | phiraba bahori tumhahim̐ sira nāī ||
एहि बिधि पूँछहिं प्रेम-बस, पुलक-गात जल-नैन ।
कृपासिन्धु फेरहिँ तिन्हहिँ, कहि बिनीत मृदु-बैन ॥
ehi bidhi pūm̐chahiṃ prema-basa, pulaka-gāta jala-naina |
kṛpāsindhu pherahim̐ tinhahim̐, kahi binīta mṛdu-baina ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0