अयोध्याकाण्ड

अध्याय 108: परस्पर आदर और प्रयागवासियों का दर्शन

5 श्लोक · 108 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

परस्पर आदर और प्रयागवासियों का दर्शन

मुनि के वचन सुनकर श्रीराम सकुचा गए और भाव, भक्ति तथा आनन्द से तृप्त हो गए। तब रघुबर ने मुनि का सुन्दर सुयश करोड़ों प्रकार से सबको कह सुनाया, कि हे मुनीश, वही बड़ा है और वही सब गुणों का घर है जिसे आप आदर देते हैं। मुनि और रघुवीर एक दूसरे को प्रणाम करते हैं और वाणी से परे सुख का अनुभव करते हैं। यह समाचार पाकर प्रयाग के निवासी, ब्रह्मचारी, तपस्वी, मुनि, सिद्ध और उदासीन, सब दशरथ के सुन्दर पुत्रों को देखने भरद्वाज के आश्रम आए। श्रीराम ने सबको प्रणाम किया, और वे आशीर्वाद देकर सुन्दरता सराहते लौटे। श्रीराम ने रात वहीं विश्राम किया, सबेरे प्रयाग में स्नान किया, और मुनि को सिर नवाकर सीता, लक्ष्मण और सेवक सहित चल पड़े।

108.1

सुनि मुनि बचन राम सकुचाने । भाव भगति आनन्द अघाने ॥
तब रघुबर मुनि सुजस सुहावा । कोटि भाँति कहि सबहि सुनावा ॥

suni muni bacana rāma sakucāne | bhāva bhagati ānanda aghāne ||
taba raghubara muni sujasa suhāvā | koṭi bhām̐ti kahi sabahi sunāvā ||

108.2

सो बड़ सो सब गुन-गन-गेहू । जेहि मुनीस तुम्ह आदर देहू ॥
मुनि रघुबीर परसपर नवहीं । बचन-अगोचर सुख अनुभवहीं ॥

so bar̤a so saba guna-gana-gehū | jehi munīsa tumha ādara dehū ||
muni raghubīra parasapara navahīṃ | bacana-agocara sukha anubhavahīṃ ||

108.3

यह सुधि पाइ प्रयाग-निवासी । बटु तापस मुनि सिद्ध उदासी ॥
भरद्वाज आश्रम सब आए । देखन दसरथ सुअन सुहाये ॥

yaha sudhi pāi prayāga-nivāsī | baṭu tāpasa muni siddha udāsī ||
bharadvāja āśrama saba āe | dekhana dasaratha suana suhāye ||

108.4

राम प्रनाम कीन्ह सब काहू । मुदित भये लहि लोचन-लाहू ॥
देहिँ असीस परम-सुख पाई । फिरे सराहत सुन्दरताई ॥

rāma pranāma kīnha saba kāhū | mudita bhaye lahi locana-lāhū ||
dehim̐ asīsa parama-sukha pāī | phire sarāhata sundaratāī ||

दो॰ 108दोहा

राम कीन्ह बिश्राम निसि, प्रात प्रयाग नहाइ ।
चले सहित सिय-लखन-जन, मुददित मुनिहिँ सिर नाइ ॥

rāma kīnha biśrāma nisi, prāta prayāga nahāi |
cale sahita siya-lakhana-jana, mudadita munihim̐ sira nāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0