तब मज्जन करि रघुकुल नाथा । पूजि पारथिव नायउ माथा ॥
सियँ सुरसरिहि कहेउ कर जोरी । मातु मनोरथ पुरउबि मोरी ॥
taba majjana kari raghukula nāthā | pūji pārathiva nāyau māthā ||
siyam̐ surasarihi kaheu kara jorī | mātu manoratha puraubi morī ||
5 श्लोक · 103 में से 326
रघुकुलनाथ ने स्नान करके पार्थिव शिवलिंग का पूजन किया और सिर नवाया। सीता ने हाथ जोड़कर गंगा से कहा, हे माता, मेरा मनोरथ पूरा करना कि मैं पति और देवर के साथ कुशल से लौटकर आपकी पूजा करूँ। प्रेम रस में सनी सीता की विनती सुनकर निर्मल जल से श्रेष्ठ वाणी हुई। हे रघुवीर की प्रिया वैदेही, सुनो, तुम्हारा प्रभाव जगत में किसे विदित नहीं? तुम्हारे देखने मात्र से लोकपाल बनते हैं और सब सिद्धियाँ हाथ जोड़कर तुम्हारी सेवा करती हैं। तुमने जो इतनी बड़ी विनती सुनाई, यह मुझ पर कृपा करके बड़ाई दी है। फिर भी, हे देवी, अपनी वाणी सफल करने को आशीर्वाद देती हूँ कि तुम प्राणनाथ और देवर सहित कुशल से कोसल लौटोगी, सब मनोकामनाएँ पूरी होंगी और तुम्हारा सुयश जगत में छाया रहेगा।
तब मज्जन करि रघुकुल नाथा । पूजि पारथिव नायउ माथा ॥
सियँ सुरसरिहि कहेउ कर जोरी । मातु मनोरथ पुरउबि मोरी ॥
taba majjana kari raghukula nāthā | pūji pārathiva nāyau māthā ||
siyam̐ surasarihi kaheu kara jorī | mātu manoratha puraubi morī ||
पति-देवर-सँग कुसल बहोरी । आइ करउँ जेहिं पूजा तोरी ॥
सुनि सिय बिनय प्रेम रस सानी । भइ तब बिमल बारि बर बानी ॥
pati-devara-sam̐ga kusala bahorī | āi karaum̐ jehiṃ pūjā torī ||
suni siya binaya prema rasa sānī | bhai taba bimala bāri bara bānī ||
सुनु रघुबीर प्रिया बैदेही । तव प्रभाउ जग बिदित न केही ॥
लोकप होहिं बिलोकत तोरें । तोहि सेवहिं सब सिधि कर जोरें ॥
sunu raghubīra priyā baidehī | tava prabhāu jaga bidita na kehī ||
lokapa hohiṃ bilokata toreṃ | tohi sevahiṃ saba sidhi kara joreṃ ||
तुम्ह जो हमहि बड़ि बिनय सुनाई । कृपा कीन्ह मोहि दीन्हि बड़ाई ॥
तदपि देबि मैं देबि असीसा । सफल होपन हित निज बागीसा ॥
tumha jo hamahi bar̤i binaya sunāī | kṛpā kīnha mohi dīnhi bar̤āī ||
tadapi debi maiṃ debi asīsā | saphala hopana hita nija bāgīsā ||
प्राननाथ देवर सहित, कुसल कोसला आइ ।
पूजिहि सब मनकामना, सुजस रहिहि जग छाइ ॥
prānanātha devara sahita, kusala kosalā āi |
pūjihi saba manakāmanā, sujasa rahihi jaga chāi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0