अयोध्याकाण्ड

अध्याय 104: गुह की सेवा की विनती और साथ चलना

5 श्लोक · 104 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

गुह की सेवा की विनती और साथ चलना

गंगा के मंगलमय वचन सुनकर सीता प्रसन्न हुईं। तब प्रभु ने गुह से घर जाने को कहा, सुनते ही उसका मुख सूख गया और हृदय जलने लगा। हाथ जोड़कर वह दीन वचन बोला, हे रघुकुलमणि, मेरी विनती सुनिए। मुझे साथ रहकर मार्ग दिखाने और कुछ दिन चरणों की सेवा करने दीजिए। जिस वन में आप रहेंगे वहाँ मैं सुन्दर पर्णकुटी बना दूँगा, फिर जैसी आज्ञा होगी वही करूँगा, रघुवीर की दुहाई है। उसका सहज स्नेह देखकर श्रीराम ने उसे साथ ले लिया, गुह का हृदय उल्लास से भर गया। गुह ने अपनी जाति के सब लोगों को बुलाकर सन्तुष्ट करके विदा किया। तब प्रभु ने गणपति और शिव का स्मरण किया, गंगा को सिर नवाया, और सखा, भाई तथा सीता सहित वन की ओर चल पड़े।

104.1

गङ्ग बचन सुनि मङ्गल मूला । मुदित सीय सुरसरि अनुकूला ॥
तब प्रभु गुहहि कहेउ घर जाहू । सुनत सूख मुख भा उर दाहू ॥

gaṅga bacana suni maṅgala mūlā | mudita sīya surasari anukūlā ||
taba prabhu guhahi kaheu ghara jāhū | sunata sūkha mukha bhā ura dāhū ||

104.2

दीन बचन गुह कह कर जोरी । बिनय सुनहु रघुकुल-मनि मारी ॥
नाथ साथ रहि पन्थ देखाई । करि दिन चारि चरन-सेवकाई ॥

dīna bacana guha kaha kara jorī | binaya sunahu raghukula-mani mārī ||
nātha sātha rahi pantha dekhāī | kari dina cāri carana-sevakāī ||

104.3

जेहिं बन जाइ रहब रघुराई । परन-कुटी मैं करबि सुहाई ॥
तब मोहि कहँ जसि देव रजाई । सोइ करिहउँ रघुबीर-दोहाई ॥

jehiṃ bana jāi rahaba raghurāī | parana-kuṭī maiṃ karabi suhāī ||
taba mohi kaham̐ jasi deva rajāī | soi karihaum̐ raghubīra-dohāī ||

104.4

सहज सनेह राम लखि ताल । सङ्ग लीन्ह गुह हृदय हुलासू ॥
पुनि गुहँ ज्ञाति बोलि सब लीन्हे । करि परितोष बिदा तब कीन्हे ॥

sahaja saneha rāma lakhi tāla | saṅga līnha guha hṛdaya hulāsū ||
puni guham̐ jñāti boli saba līnhe | kari paritoṣa bidā taba kīnhe ||

दो॰ 104दोहा

तब गनपति सिव सुमिरि प्रभु, नाइ सुरसरिहि माथ ।
सखा अनुज सिया सहित बन, गवन कीन्ह रधुनाथ ॥

taba ganapati siva sumiri prabhu, nāi surasarihi mātha |
sakhā anuja siyā sahita bana, gavana kīnha radhunātha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0