अयोध्याकाण्ड

अध्याय 102: सीता की मुद्रिका और केवट का उतराई से इनकार

5 श्लोक · 102 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

सीता की मुद्रिका और केवट का उतराई से इनकार

सीता, राम, गुह और लक्ष्मण गंगा की रेती पर उतरे और केवट ने दण्डवत किया। प्रभु को संकोच हुआ कि इसे कुछ नहीं दिया। प्रियतम के मन की जानने वाली सीता ने प्रसन्न होकर मणि की अँगूठी उतारी, और कृपालु ने कहा, अपनी उतराई लो। केवट ने व्याकुल होकर चरण पकड़ लिए। हे नाथ, आज मैंने क्या नहीं पाया? मेरे दोष, दुख और दरिद्रता की आग बुझ गई। बहुत दिन मजदूरी की, आज विधाता ने भरपूर मजदूरी दे दी। अब मुझे कुछ नहीं चाहिए, लौटते समय आप जो देंगे वह प्रसाद सिर पर धरकर लूँगा। प्रभु, लक्ष्मण और सीता ने बहुत आग्रह किया, पर केवट ने कुछ न लिया, और करुणा के धाम ने उसे निर्मल भक्ति का वर देकर विदा किया।

102.1

उतरि ठाढ़ भये सुरसरि-रेता । सीय रोम गुह लखन समेता ॥
केवट उतरि दंडवत कीन्हा । प्रभुहि सकुच एहि नहिँ कछु दीन्हा ॥

utari ṭhār̤ha bhaye surasari-retā | sīya roma guha lakhana sametā ||
kevaṭa utari daṃḍavata kīnhā | prabhuhi sakuca ehi nahim̐ kachu dīnhā ||

102.2

पिय हिय की सिय जाननिहारी । मनि-मुदरी मन-मुदित उतारी ॥
कहेउ कृपालु-लेहि उतराई । केवट चरन गहे अकुलाई ॥

piya hiya kī siya jānanihārī | mani-mudarī mana-mudita utārī ||
kaheu kṛpālu-lehi utarāī | kevaṭa carana gahe akulāī ||

102.3

नाथ आजु में काह न पावा । मिटे दोष-दुख-दारिद-दावा ॥
बहुत काल में कीन्हि मजूरी । आजु दीन्ह बिधि बनि भलि भूरी ॥

nātha āju meṃ kāha na pāvā | miṭe doṣa-dukha-dārida-dāvā ||
bahuta kāla meṃ kīnhi majūrī | āju dīnha bidhi bani bhali bhūrī ||

102.4

अब कछु नाथ न चाहिय मोरें । दीन दयाल अनुग्रह तोरें ॥
फिरती बार मोहि जो देवा । सो प्रसाद मैं सिर धरि लेबा ॥

aba kachu nātha na cāhiya moreṃ | dīna dayāla anugraha toreṃ ||
phiratī bāra mohi jo devā | so prasāda maiṃ sira dhari lebā ||

दो॰ 102दोहा

बहुत कीन्ह प्रभु लखन सियँ, नहिँ कछु केवट लेइ ।
बिदा कीन्ह करुनायतन, भगति बिमल बर देइ ॥

bahuta kīnha prabhu lakhana siyam̐, nahim̐ kachu kevaṭa lei |
bidā kīnha karunāyatana, bhagati bimala bara dei ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0