कृपासिन्धु बोले मुसुकाई । सोइ कर जेहि तब नाव न जाई ॥
बेगि आनु जल पाय पखारू । होत बिलम्ब उतारहि पारू ॥
kṛpāsindhu bole musukāī | soi kara jehi taba nāva na jāī ||
begi ānu jala pāya pakhārū | hota bilamba utārahi pārū ||
5 श्लोक · 101 में से 326
कृपासिन्धु मुस्कुराकर बोले, वही करो जिससे तुम्हारी नाव न जाए, जल्दी जल लाकर पाँव पखारो, देर हो रही है। तुलसीदास विस्मित हैं कि जिनका नाम एक बार स्मरण करने से मनुष्य भवसागर पार कर जाते हैं, और जिन्होंने जगत को तीन पग से भी छोटा कर दिया, वही कृपालु केवट से निहोरा कर रहे हैं। प्रभु के पद नख देखकर गंगा हर्षित हुईं, पर उनके वचन सुनकर बुद्धि मोह में खिंच गई। आज्ञा पाकर केवट कठौते में जल भर लाया और अनुराग से उमगकर चरणकमल धोने लगा। देवता फूल बरसाकर सिहाते हैं कि इसके समान पुण्य किसी का नहीं। परिवार सहित चरणोदक पीकर, पितरों को पार करके, वह प्रसन्न होकर प्रभु को पार ले गया।
कृपासिन्धु बोले मुसुकाई । सोइ कर जेहि तब नाव न जाई ॥
बेगि आनु जल पाय पखारू । होत बिलम्ब उतारहि पारू ॥
kṛpāsindhu bole musukāī | soi kara jehi taba nāva na jāī ||
begi ānu jala pāya pakhārū | hota bilamba utārahi pārū ||
जासु नाम सुमिरत एक बारा । उतरहिं नर भव-सिन्धु अपारा ॥
सोइ कृपाल केवटहि निहोरा । जेहिं जग किय तिहुँ पगहु ते थोरा ॥
jāsu nāma sumirata eka bārā | utarahiṃ nara bhava-sindhu apārā ||
soi kṛpāla kevaṭahi nihorā | jehiṃ jaga kiya tihum̐ pagahu te thorā ||
पद-नख निरखि देवसरि हरषी । सुनि प्रभु बचन माहि मति करषी ॥
केवट राम-रजायसु पावा । पानि कठवता भरि लेइ आवा ॥
pada-nakha nirakhi devasari haraṣī | suni prabhu bacana māhi mati karaṣī ||
kevaṭa rāma-rajāyasu pāvā | pāni kaṭhavatā bhari lei āvā ||
अति आनन्द उमगि अनुरागा । चरन-सरोज पखारन लागा ॥
बरषि सुमन सुर सकल सिहाहीं । एहि सम पुन्य-पुञ्ज कोउ नाहीं ॥
ati ānanda umagi anurāgā | carana-saroja pakhārana lāgā ||
baraṣi sumana sura sakala sihāhīṃ | ehi sama punya-puñja kou nāhīṃ ||
पद पखारि जल पान करि, आपु सहित परिवार ।
पितर पार करि प्रभुहि पुनि, मुदित गयउ लेइ पार ॥
pada pakhāri jala pāna kari, āpu sahita parivāra |
pitara pāra kari prabhuhi puni, mudita gayau lei pāra ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0