अयोध्याकाण्ड

अध्याय 10: समाचार सुनकर श्रीराम का पछतावा

5 श्लोक · 10 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

समाचार सुनकर श्रीराम का पछतावा

श्रीराम के गुण और स्वभाव का बखान करके मुनिराज बोले: राजा ने अभिषेक की तैयारी की है और तुम्हें युवराज बनाना चाहते हैं। राम, आज सब संयम करो, जिससे विधाता कुशल से काम निभा दे। यह शिक्षा देकर गुरु राजा के पास चले गए। श्रीराम के हृदय में विस्मय हुआ कि हम सब भाई एक साथ जन्मे, भोजन, शयन और बचपन के खेल साथ हुए, कनछेदन, जनेऊ और विवाह के उत्सव भी साथ हुए। इस निर्मल वंश में यही एक बात अनुचित है कि भाइयों को छोड़कर बड़े का ही अभिषेक हो। तुलसीदास कहते हैं कि प्रभु का यह प्रेमभरा पछतावा भक्तों के मन की कुटिलता हर ले। उसी समय प्रेम और आनन्द में मग्न लक्ष्मण आए और श्रीराम ने प्रिय वचन कहकर उनका सम्मान किया।

10.1

बरनि राम गुन सील सुभाऊ । बोले प्रेम पुलकि मुनिराऊ ॥
भूप सजेउ अभिषेक-समाजू । चाहत देन तुम्हहिँ जुबराजू ॥

barani rāma guna sīla subhāū | bole prema pulaki munirāū ||
bhūpa sajeu abhiṣeka-samājū | cāhata dena tumhahim̐ jubarājū ||

10.2

राम करहु सब सञ्जम आजू । जौँ विधि कुसल निबाहै काजू ॥
गुरु सिख देइ राय पहिँ गयऊ । राम हृदयँ अस बिसमय भयऊ ॥

rāma karahu saba sañjama ājū | jaum̐ vidhi kusala nibāhai kājū ||
guru sikha dei rāya pahim̐ gayaū | rāma hṛdayam̐ asa bisamaya bhayaū ||

10.3

जनमे एक सङ्ग सब भाई । भोजन सयन केलि-लरिकाई ॥
करनबेध उपबीत बिआहा । सङ्ग सङ्ग सब भयउ उछाहा ॥

janame eka saṅga saba bhāī | bhojana sayana keli-larikāī ||
karanabedha upabīta biāhā | saṅga saṅga saba bhayau uchāhā ||

10.4

बिमल-बंस यह अनुचित एकू । बन्धु बिहाइ बड़ेहि अभिषेकू ॥
प्रभु सप्रेम पछितानि सुहाई । हरउ भगत-मन कै कुटिलाई ॥

bimala-baṃsa yaha anucita ekū | bandhu bihāi bar̤ehi abhiṣekū ||
prabhu saprema pachitāni suhāī | harau bhagata-mana kai kuṭilāī ||

दो॰ 10दोहा

तेहि अवसर आये लखन, मगन प्रेम आनन्द ।
सनमाने प्रिय बचन कहि, रघुकुल-कैरव-चन्द ॥

tehi avasara āye lakhana, magana prema ānanda |
sanamāne priya bacana kahi, raghukula-kairava-canda ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0