अरण्यकाण्ड

अध्याय 38: काम की सेना और तीन प्रबल शत्रु

8 श्लोक · 38 में से 46

इस अध्याय में क्या होता है

काम की सेना और तीन प्रबल शत्रु

राम वसन्त के वन को कामदेव की छावनी के रूप में देखते हैं। लताओं से उलझे विशाल वृक्ष मानो तने हुए चँदोवे हैं, केले और ताड़ ध्वजा-पताका। रंग-बिरंगे फूले वृक्ष वर्दी पहने धनुर्धर हैं; कोयलें मतवाले हाथी, मोर और तोते घोड़े। झरने नगाड़े हैं और शीतल, मन्द, सुगन्धित पवन दूत। ऐसी चतुरंगिनी सेना लेकर वह मानो चुनौती देता घूमता है। लक्ष्मण, काम की सेना देखकर जो धीर रहते हैं, उन्हीं की जगत में मर्यादा रहती है। इसका सबसे बड़ा बल स्त्री है; उससे जो बचे, वही बड़ा योद्धा है। तात, काम, क्रोध और लोभ, ये तीन अत्यन्त प्रबल दुष्ट विज्ञान के धाम मुनियों के मन को भी पल में क्षुब्ध कर देते हैं। लोभ का बल इच्छा और दम्भ है, काम का केवल स्त्री, क्रोध का कठोर वचन।

38.1

बिटप-बिसाल लता अरुझानी । बिबिध बितान दिये जनु तानी ॥
कदलि ताल घर धुजा पताका । देखि न मोह धीर मन जाका ॥

biṭapa-bisāla latā arujhānī | bibidha bitāna diye janu tānī ||
kadali tāla ghara dhujā patākā | dekhi na moha dhīra mana jākā ||

38.2

बिबिध भाँति फूले तरु नाना । जनु बानैत बने बहु बाना ॥
कहुँ कहुँ सुन्दर बिटप सुहाये । जनु भट बिलग बिलग होइ छाये ॥

bibidha bhām̐ti phūle taru nānā | janu bānaita bane bahu bānā ||
kahum̐ kahum̐ sundara biṭapa suhāye | janu bhaṭa bilaga bilaga hoi chāye ||

38.3

कूजत पिक मानहुँ गज माते । ढेक महोख ऊँट बिसराते ॥
मोर-चकोर-कीर बर बाजी । पारावत मराल सब ताजी ॥

kūjata pika mānahum̐ gaja māte | ḍheka mahokha ūm̐ṭa bisarāte ||
mora-cakora-kīra bara bājī | pārāvata marāla saba tājī ||

38.4

तीतिर लावक पदचर जूथा । बरनि न जाइ मनोज बरूथा ॥
रथ गिरि सिला दुन्दुभी झरना । चातक बन्दी गुन-गन बरना ॥

tītira lāvaka padacara jūthā | barani na jāi manoja barūthā ||
ratha giri silā dundubhī jharanā | cātaka bandī guna-gana baranā ||

38.5

मधुकर-मुखर भेरि सहनाई । त्रिबिध बयारि बसीठीं आई ॥
चतुरङ्गिनी सेन सँग लीन्हें । बिचरत मनहुँ चुनौती दीन्हें ॥

madhukara-mukhara bheri sahanāī | tribidha bayāri basīṭhīṃ āī ||
caturaṅginī sena sam̐ga līnheṃ | bicarata manahum̐ cunautī dīnheṃ ||

38.6

लछिमन देखत काम अनीका । रहहिँ धीर तिन्ह कै जग लीका ॥
एहि कें एक परम-बल नारी । तेहि तैं उबर सुभट सोइ भारी ॥

lachimana dekhata kāma anīkā | rahahim̐ dhīra tinha kai jaga līkā ||
ehi keṃ eka parama-bala nārī | tehi taiṃ ubara subhaṭa soi bhārī ||

दो॰ 38 (क)दोहा

तात तीनि अति प्रबल खल, काम क्रोध अरु लोभ ।
मुनि बिग्यान-धाम मन, करहिं निमिष महँ छोभ ॥

tāta tīni ati prabala khala, kāma krodha aru lobha |
muni bigyāna-dhāma mana, karahiṃ nimiṣa maham̐ chobha ||

दो॰ 38 (ख)दोहा

लोभ कें इच्छा दम्भ बल, काम कें केवल नारि ।
क्रोध के परुष-बचन बल, मुनिबर कहहिँ बिचारि ॥

lobha keṃ icchā dambha bala, kāma keṃ kevala nāri |
krodha ke paruṣa-bacana bala, munibara kahahim̐ bicāri ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0