तब कह गीध बचन धरि धीरा । सुनहु राम भञ्जन-भव-भीरा ॥
नाथ दसानन यह गति कीन्ही । तेहि खल जनक-सुता हरि लीन्ही ॥
taba kaha gīdha bacana dhari dhīrā | sunahu rāma bhañjana-bhava-bhīrā ||
nātha dasānana yaha gati kīnhī | tehi khala janaka-sutā hari līnhī ||
6 श्लोक · 31 में से 46
धीरज धरकर जटायु बोले: भव-भय मिटाने वाले राम, सुनिए; नाथ, दशानन ने मेरी यह गति की है। उसी दुष्ट ने जानकी को हर लिया और उन्हें दक्षिण दिशा में ले गया। प्रभु के दर्शन के लिए ही प्राण रखे थे, अब वे जाना चाहते हैं। राम ने कहा: तात, शरीर रखिए। जटायु मुस्कराकर बोले: मरते समय जिनका नाम मुख में आने से अधम भी मुक्त होता है, ऐसा वेद गाते हैं, वही मेरे नेत्रों के सामने हैं; अब किस कमी के लिए देह रखूँ? नेत्रों में जल भरकर रघुराज बोले: तात, आपने अपने कर्म से यह गति पाई। देह छोड़कर मेरे धाम जाइए; आप पूर्णकाम हैं, आपको क्या दूँ? सीता-हरण की बात पिताजी से न कहिएगा। यदि मैं राम हूँ, तो दशानन कुल सहित वहाँ जाकर स्वयं कहेगा।
तब कह गीध बचन धरि धीरा । सुनहु राम भञ्जन-भव-भीरा ॥
नाथ दसानन यह गति कीन्ही । तेहि खल जनक-सुता हरि लीन्ही ॥
taba kaha gīdha bacana dhari dhīrā | sunahu rāma bhañjana-bhava-bhīrā ||
nātha dasānana yaha gati kīnhī | tehi khala janaka-sutā hari līnhī ||
लेइ दच्छिन-दिसि गयउ गोसाँई । बिलपति अति कुररी की नाँई ॥
दरस लागि प्रभु राखेंउँ प्राना । चलन चहत अब कृपानिधाना ॥
lei dacchina-disi gayau gosām̐ī | bilapati ati kurarī kī nām̐ī ||
darasa lāgi prabhu rākheṃum̐ prānā | calana cahata aba kṛpānidhānā ||
राम कहा तनु राखहु ताता । मुख मुसकाइ कही तेहिं बाता ॥
जा कर नाम मरत मुख आवा । अधमउ मुकुत होइ श्रुति गावा ॥
rāma kahā tanu rākhahu tātā | mukha musakāi kahī tehiṃ bātā ||
jā kara nāma marata mukha āvā | adhamau mukuta hoi śruti gāvā ||
सो मम लोचन गोचर भागे । राखौं देह नाथ केहि खाँगें ॥
जल भरि नयन कहिँ रघुराई । तात करम निज ते गतिं पाई ॥
so mama locana gocara bhāge | rākhauṃ deha nātha kehi khām̐geṃ ||
jala bhari nayana kahim̐ raghurāī | tāta karama nija te gatiṃ pāī ||
परहित बल जिन्ह के मन माहीं । तिन्ह कह जग दुर्लभ कछु नाहीं ॥
तनु तजि तात जाहु मम धामा । देउँ काह, तुम्ह पूरनकामा ॥
parahita bala jinha ke mana māhīṃ | tinha kaha jaga durlabha kachu nāhīṃ ||
tanu taji tāta jāhu mama dhāmā | deum̐ kāha, tumha pūranakāmā ||
सीता-हरन तात जनि, कहहु पिता सन जाइ ।
जौँ मैं राम त कुल सहित, कहिहि दसानन आइ ॥
sītā-harana tāta jani, kahahu pitā sana jāi |
jaum̐ maiṃ rāma ta kula sahita, kahihi dasānana āi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0