अरण्यकाण्ड

अध्याय 3: चित्रकूट छोड़ श्रीराम अत्रि के आश्रम पहुँचे

5 श्लोक · 3 में से 46

इस अध्याय में क्या होता है

चित्रकूट छोड़ श्रीराम अत्रि के आश्रम पहुँचे

श्रीराम ने बहुत समय चित्रकूट में रहकर वेद-अमृत-से मधुर चरित किए। फिर उन्होंने मन में विचारा कि यहाँ सब मुझे जान गए हैं, अब भीड़ होगी। सब मुनियों से विदा लेकर वे सीता और भाई के साथ चल पड़े। प्रभु के आने का समाचार सुनकर महामुनि अत्रि पुलकित शरीर से उठकर दौड़े। राम भी शीघ्रता से आगे बढ़े और दण्डवत् किया; मुनि ने उन्हें हृदय से लगा लिया और प्रेम के आँसुओं से दोनों भाइयों को नहला दिया। राम की छवि देखकर मुनि के नेत्र शीतल हुए। वे आदर सहित उन्हें आश्रम में लाए, पूजा की, मधुर वचन कहे और मन को भाने वाले कन्द-मूल-फल दिए। प्रभु को आसन पर बैठाकर, नेत्र भरकर शोभा निहारते हुए परम प्रवीण मुनि हाथ जोड़कर स्तुति करने लगे।

3.1

रघुपति चित्रकूट मसि नाना । चरित किये श्रुति सुधा समाना ॥
बहुरि राम अस मन अनुमाना । होइहि भीर सबहिँ मोहि जाना ॥

raghupati citrakūṭa masi nānā | carita kiye śruti sudhā samānā ||
bahuri rāma asa mana anumānā | hoihi bhīra sabahim̐ mohi jānā ||

3.2

सकल मुनिन्ह सन बिदा कराई । सीता सहित चले दोउ भाई ॥
अत्रि के आस्रम जब प्रभु गयऊ । सुनत महामुनि हरषित भयऊ ॥

sakala muninha sana bidā karāī | sītā sahita cale dou bhāī ||
atri ke āsrama jaba prabhu gayaū | sunata mahāmuni haraṣita bhayaū ||

3.3

पुलकित गात अत्रि उठि धाये । देखि राम आतुर चलि आये ॥
करत दंडवत मुनि उर लाये । प्रेम-बारि दोउ जन अन्हवाये ॥

pulakita gāta atri uṭhi dhāye | dekhi rāma ātura cali āye ||
karata daṃḍavata muni ura lāye | prema-bāri dou jana anhavāye ||

3.4

देखि राम छबि नयन जुड़ाने । सादर निज-आश्रम तब आने ॥
करि पूजा कहि बचन सुहाये । दिये मूल फल प्रभु मन भाये ॥

dekhi rāma chabi nayana jur̤āne | sādara nija-āśrama taba āne ||
kari pūjā kahi bacana suhāye | diye mūla phala prabhu mana bhāye ||

3.सो॰ 3सोरठा

प्रभु आसन आसीन, भरि लोचन सोभा निरखि ।
मुनिबर परम प्रबीन, जोरि पानि अस्तुति करत ॥

prabhu āsana āsīna, bhari locana sobhā nirakhi |
munibara parama prabīna, jori pāni astuti karata ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0