सुनत सभासद उठे अकुलाई । समुझाई गहि बाहँ उठाई ॥
कह लङ्केस कहसि किन बाता । केइ तब नासा कान निपाता ॥
sunata sabhāsada uṭhe akulāī | samujhāī gahi bāham̐ uṭhāī ||
kaha laṅkesa kahasi kina bātā | kei taba nāsā kāna nipātā ||
7 श्लोक · 22 में से 46
सभासद अकुलाकर उठे और बाँह पकड़कर उसे उठाया। लंकापति ने पूछा: बता, किसने तेरे नाक-कान काटे? वह बोली: अवधनरेश दशरथ के पुत्र, पुरुषों में सिंह, वन में मानो खेलने आए हैं। मैं उनकी करनी समझ गई, वे धरती को राक्षसों से रहित कर देंगे। देखने में बालक, पर काल के समान, अतुल बलशाली धनुर्धर। बड़े का नाम राम है, शोभा का धाम, और उनके साथ एक युवती है, सौ करोड़ रति उस पर न्योछावर हैं। उनके छोटे भाई ने, यह सुनकर कि मैं तुम्हारी बहन हूँ, मेरे नाक-कान काट दिए। खर, दूषन और त्रिशिरा का वध सुनकर रावण के सब अंग जल उठे। शूर्पणखा को समझाकर वह महल गया, पर चिन्ता से रात भर नींद न आई।
सुनत सभासद उठे अकुलाई । समुझाई गहि बाहँ उठाई ॥
कह लङ्केस कहसि किन बाता । केइ तब नासा कान निपाता ॥
sunata sabhāsada uṭhe akulāī | samujhāī gahi bāham̐ uṭhāī ||
kaha laṅkesa kahasi kina bātā | kei taba nāsā kāna nipātā ||
अवध-नृपति-दसरथ के जाये । पुरुष सिंघ बन खेलन आये ॥
समुझि परी मोहि उन्ह कै करनी । रहित निसाचर करिहहिँ धरनी ॥
avadha-nṛpati-dasaratha ke jāye | puruṣa siṃgha bana khelana āye ||
samujhi parī mohi unha kai karanī | rahita nisācara karihahim̐ dharanī ||
जिन्ह कर भुज-बल पाइ दसानन । अभय भये विचरत मुनि कानन ॥
देखत बालक काल समाना । परम धीर धन्वी गुन नाना ॥
jinha kara bhuja-bala pāi dasānana | abhaya bhaye vicarata muni kānana ||
dekhata bālaka kāla samānā | parama dhīra dhanvī guna nānā ||
अतुलित बल प्रताप द्वौ भ्राता । खल-बध रत सुर-मुनि-सुख-दाता ॥
सोभा-धाम राम अस नामा । तिन्ह के संग नारि एक स्यामा ॥
atulita bala pratāpa dvau bhrātā | khala-badha rata sura-muni-sukha-dātā ||
sobhā-dhāma rāma asa nāmā | tinha ke saṃga nāri eka syāmā ||
रूप-रासि बिधि नारि सँवारी । रति सत कोटि तासु बलिहारी ॥
तासु अनुज काटे श्रुति नासा । सुनि तव भगिनि करहिँ परिहासा ॥
rūpa-rāsi bidhi nāri sam̐vārī | rati sata koṭi tāsu balihārī ||
tāsu anuja kāṭe śruti nāsā | suni tava bhagini karahim̐ parihāsā ||
खर-दूषन सुनि लगे पुकारा । छन महँ सकल कटक, उन्ह मारा ॥
खर-दूषन-तिसिरा कर घाता । सुनि दससीस जरे सब गाता ॥
khara-dūṣana suni lage pukārā | chana maham̐ sakala kaṭaka, unha mārā ||
khara-dūṣana-tisirā kara ghātā | suni dasasīsa jare saba gātā ||
सूपनखहि समुझाइ करि, अल बोलेसि बहु भाँति ।
गयउ भवन अति सोच बस, नींद परइ नहिँ राति ॥
sūpanakhahi samujhāi kari, ala bolesi bahu bhām̐ti |
gayau bhavana ati soca basa, nīṃda parai nahim̐ rāti ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0