अरण्यकाण्ड

अध्याय 23: रावण का हरि से वैर ठानने का निश्चय

5 श्लोक · 23 में से 46

इस अध्याय में क्या होता है

रावण का हरि से वैर ठानने का निश्चय

रात को अकेले में रावण विचारता है: किसी लोक में मेरे सेवकों की बराबरी करने वाला भी कोई नहीं। खर-दूषन मेरे समान बलवान थे, भगवान के सिवा उन्हें कौन मार सकता है? यदि भगवान ने अवतार लिया है, तो मैं जाकर हठ से वैर करूँगा और प्रभु के बाण से प्राण छोड़कर भवसागर तर जाऊँगा। इस तामसी देह से भजन नहीं होगा, मन, कर्म और वचन से यही दृढ़ निश्चय है। और यदि वे कोई मनुष्य-रूप राजकुमार हैं, तो दोनों को रण में जीतकर स्त्री हर लाऊँगा। वह अकेला रथ पर समुद्र-तट पर मारीच के पास गया। फिर शिवजी उमा से कहते हैं: इधर राम ने जो युक्ति रची, वह सुन्दर कथा सुनो। जब लक्ष्मण कन्द-मूल-फल लेने वन गए, तब प्रभु हँसकर जानकी से बोले।

23.1

सुर नर असुर नाग खग माहीं । मोरे अनुचर कहँ कोउ नाहीँ ॥
खर दूषन मोहि सम बलवंता । तिन्हहिँ को मारइ बिनु भगवन्ता ॥

sura nara asura nāga khaga māhīṃ | more anucara kaham̐ kou nāhīm̐ ||
khara dūṣana mohi sama balavaṃtā | tinhahim̐ ko mārai binu bhagavantā ||

23.2

सुर-रंजन भंजन-महि भारा । जौँ भगवन्त लीन्ह अवतारा ॥
तौ मैं जाइ बैरु हठि करऊँ । प्रभु सर प्रान तजें भव तरऊँ ॥

sura-raṃjana bhaṃjana-mahi bhārā | jaum̐ bhagavanta līnha avatārā ||
tau maiṃ jāi bairu haṭhi karaūm̐ | prabhu sara prāna tajeṃ bhava taraūm̐ ||

23.3

होइहि भजन न तामस-देहा । मन क्रम बचन मन्त्र दृढ़ एहा ॥
जौँ नर-रूप भूप-सुत कोऊ । हरिहउँ नारि जीति रन दोऊ ॥

hoihi bhajana na tāmasa-dehā | mana krama bacana mantra dṛr̤ha ehā ||
jaum̐ nara-rūpa bhūpa-suta koū | harihaum̐ nāri jīti rana doū ||

23.4

चला अकेल जान चढ़ि तहवाँ । बस मारीच सिन्धु-तट जहवाँ ॥
इहाँ राम जसि जुगुति बनाई । सुनहु उमा सो कथा सुहाई ॥

calā akela jāna car̤hi tahavām̐ | basa mārīca sindhu-taṭa jahavām̐ ||
ihām̐ rāma jasi juguti banāī | sunahu umā so kathā suhāī ||

दो॰ 23दोहा

लछिमन गये बनहिं जब, लेन-मूल-फल-कन्द ।
जनक-सुता सन बोले, बिहँसि कृपा-सुख-बृन्द ॥

lachimana gaye banahiṃ jaba, lena-mūla-phala-kanda |
janaka-sutā sana bole, biham̐si kṛpā-sukha-bṛnda ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0