एवमस्तु कहि रमानिवासा । हरषि चले कुम्भज-रिषि पासा ॥
बहुत दिवस गुरु दरसन पाये । भये मोहि एहिं आश्रम आये ॥
evamastu kahi ramānivāsā | haraṣi cale kumbhaja-riṣi pāsā ||
bahuta divasa guru darasana pāye | bhaye mohi ehiṃ āśrama āye ||
8 श्लोक · 12 में से 46
'एवमस्तु' कहकर प्रभु अगस्त्य ऋषि के पास चले। सुतीक्ष्ण ने चतुराई से सोचा: गुरु-दर्शन किए बहुत दिन हुए, अब प्रभु के साथ चलूँगा, इसमें आप पर कोई उपकार नहीं। प्रभु हँसे और उन्हें साथ ले लिया। मार्ग में वे अपनी अनुपम भक्ति का वर्णन करते चले। सुतीक्ष्ण आगे जाकर गुरु को दण्डवत् करके बोले: कोसलपति के कुमार, जगत के आधार राम, अनुज और वैदेही सहित आए हैं, जिनका आप दिन-रात जप करते हैं। सुनते ही अगस्त्य उठकर दौड़े, नेत्रों में जल भर आया। दोनों भाई चरणों में गिरे, ऋषि ने उन्हें हृदय से लगाया, आसन देकर पूजा की। वहाँ के सब मुनि शरद-चन्द्र को देखते चकोरों की भाँति राम को निहारते रहे।
एवमस्तु कहि रमानिवासा । हरषि चले कुम्भज-रिषि पासा ॥
बहुत दिवस गुरु दरसन पाये । भये मोहि एहिं आश्रम आये ॥
evamastu kahi ramānivāsā | haraṣi cale kumbhaja-riṣi pāsā ||
bahuta divasa guru darasana pāye | bhaye mohi ehiṃ āśrama āye ||
अब प्रभु सङ्ग जाउँ गुरु पाहीं । तुम्ह कहँ नाथ निहोरा नाहीं ॥
देखि कृपानिधि मुनि चतुराई । लिये सङ्ग बिहँ से दोउ भाई ॥
aba prabhu saṅga jāum̐ guru pāhīṃ | tumha kaham̐ nātha nihorā nāhīṃ ||
dekhi kṛpānidhi muni caturāī | liye saṅga biham̐ se dou bhāī ||
पन्थ कहत निज-भगति अनूपा । मुनि आश्रम पहुँचे सुरभूपा ॥
तुरत सुतीछन गुरु पहिँ गयऊ । करि दंडवत कहत अस भयऊ ॥
pantha kahata nija-bhagati anūpā | muni āśrama pahum̐ce surabhūpā ||
turata sutīchana guru pahim̐ gayaū | kari daṃḍavata kahata asa bhayaū ||
नाथ कौसलाधीस कुमारा । आए मिलन जगत-आधारा ॥
राम अनुज समेत बैदेही । निसि दिन देव जपत हहु जेही ॥
nātha kausalādhīsa kumārā | āe milana jagata-ādhārā ||
rāma anuja sameta baidehī | nisi dina deva japata hahu jehī ||
सुनत अगस्ति तुरत उठि धाये । हरि बिलोकि लोचन जल छाये ॥
मुनि पद कमल परे दोउ भाई । रिषि अति प्रीति लिये उर लाई ॥
sunata agasti turata uṭhi dhāye | hari biloki locana jala chāye ||
muni pada kamala pare dou bhāī | riṣi ati prīti liye ura lāī ||
सादर कुसल पूछि मुनि ग्यानी । आसन बर बैठारे आनी ॥
पुनि करि बहु प्रकार प्रभु पूजा । मोहि सम भाग्यवन्त नहिँ दूजा ॥
sādara kusala pūchi muni gyānī | āsana bara baiṭhāre ānī ||
puni kari bahu prakāra prabhu pūjā | mohi sama bhāgyavanta nahim̐ dūjā ||
जहँ लगि रहे अपर मुनि बृन्दा । हरषे सब बिलोकि सुखकन्दा ॥
jaham̐ lagi rahe apara muni bṛndā | haraṣe saba biloki sukhakandā ||
मुनि-समूह महँ बैठे, सन्मुख सब की ओर ।
सरद-इन्दु तन चितवत, मानहुँ निकर चकोर ॥
muni-samūha maham̐ baiṭhe, sanmukha saba kī ora |
sarada-indu tana citavata, mānahum̐ nikara cakora ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0