अनुशासन पर्व

अध्याय 19: भीष्म गरुड़ कथा की आज्ञा माँगते हैं

इति श्रीमन्महाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि एकोनविंशोऽध्यायः ॥

8 श्लोक · 19 में से 274

इस अध्याय में क्या होता है

भीष्म गरुड़ कथा की आज्ञा माँगते हैं

छोटा अध्याय, जिससे गरुड़ कथा आरम्भ होती है। युधिष्ठिर याद करते हैं कि अर्जुन की प्रशंसा करते हुए भीष्म ने गरुड़ को पक्षियों में श्रेष्ठ कहा था। गरुत्मान ने यह श्रेष्ठता कैसे पाई, और विनता के पुत्र सुपर्ण सर्पों के शत्रु क्यों हैं? भीष्म पहले श्रीकृष्ण की ओर मुड़ते हैं और कहते हैं कि देवकी ऐसे पुत्र से धन्य हैं। वे सुपर्ण की बात श्रीकृष्ण की आज्ञा से ही कहेंगे, क्योंकि अनादि काल से केशव ही सुपर्ण और गरुड़ कहे जाते हैं। श्रीकृष्ण कहते हैं कि युधिष्ठिर भी उन्हें वैसे ही जानते हैं जैसे भीष्म, और गरुड़ के जन्म का सच्चा वृत्तान्त सुनाने को कहते हैं।

युधिष्ठिर उवाच

19.1

गरुडः पक्षिणां श्रेष्ठ इति पूर्वं पितामह ।
उक्तस्त्वया महाबाहो श्वेतवाहं प्रशंसता

garuḍaḥ pakṣiṇāṃ śreṣṭha iti pūrvaṃ pitāmaha |
uktastvayā mahābāho śvetavāhaṃ praśaṃsatā

19.2

अत्र कौतूहल इति श्रवणे जायते मतिः ।
कथं गरुत्मान्पक्षीणां श्रैष्ठ्यं प्राप परन्तप

atra kautūhala iti śravaṇe jāyate matiḥ |
kathaṃ garutmānpakṣīṇāṃ śraiṣṭhyaṃ prāpa parantapa

19.3

सुपर्णो वैनतेयश्च केन शत्रुश्च भोगिनाम् ।
किंवीर्यः किंबलश्चासौ वक्तुमर्हसि भारत

suparṇo vainateyaśca kena śatruśca bhoginām |
kiṃvīryaḥ kiṃbalaścāsau vaktumarhasi bhārata

भीष्म उवाच

19.4

वासुदेव महाबाहो देवकी सुप्रजास्त्वया ।
श्रुतं ते धर्मराजस्य मम हर्षविवर्धन

vāsudeva mahābāho devakī suprajāstvayā |
śrutaṃ te dharmarājasya mama harṣavivardhana

19.5

सुपर्णं शंस इत्येव मामाह कुरुनन्दनः ।
अस्य प्रवक्तुमिच्छामि त्वयाऽज्ञप्तो महाद्युते

suparṇaṃ śaṃsa ityeva māmāha kurunandanaḥ |
asya pravaktumicchāmi tvayā'jñapto mahādyute

19.6

त्वं हि शौरे महाबाहो सुपर्णः प्रोच्यसे पुरा ।
अनादिनिधने काले गरुडश्चासि केशव

tvaṃ hi śaure mahābāho suparṇaḥ procyase purā |
anādinidhane kāle garuḍaścāsi keśava

19.7

तस्मात्पूर्वं प्रसाद्य त्वां धर्मपुत्राय धीमते ।
गरुडं पततांश्रेष्ठं वक्तुमिच्छामि माधव

tasmātpūrvaṃ prasādya tvāṃ dharmaputrāya dhīmate |
garuḍaṃ patatāṃśreṣṭhaṃ vaktumicchāmi mādhava

वासुदेव उवाच

19.8

यथैव मां भवान्वेद तथा वेद युधिष्ठिरः ।
यथा च गरुडो जातस्तथाऽस्मै ब्रूहि तत्वतः

yathaiva māṃ bhavānveda tathā veda yudhiṣṭhiraḥ |
yathā ca garuḍo jātastathā'smai brūhi tatvataḥ

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