आदि पर्व

अध्याय 26: इन्द्र झुलसे सर्पों पर वर्षा करते हैं

इति श्रीमन्महाभारते आदिपर्वणि पौलोमपर्वणि षड्विंशोऽध्यायः ॥

8 श्लोक · 26 में से 261

इस अध्याय में क्या होता है

इन्द्र झुलसे सर्पों पर वर्षा करते हैं

कद्रू की स्तुति से प्रसन्न होकर हरे घोड़ों वाले भगवान इन्द्र मेघों को अमृत जैसी शुभ वर्षा करने की आज्ञा देते हैं। मेघ घिर आते हैं और आकाश में निरन्तर एक दूसरे से होड़ करते हुए गरजते हैं, भारी गर्जना के साथ अपार जल बरसाते हैं। बिजली और वायु से काँपते, कड़कते मेघों से आकाश इतना ढक जाता है कि सूर्य और चन्द्रमा की किरणें लुप्त हो जाती हैं। पृथ्वी चारों ओर से जल से भर जाती है, और भूमि बार बार वर्षा की लहरों से ढकती है। यह छोटा अध्याय पूरा इसी वर्षा के वर्णन में है। यहाँ पुष्पिका में उपपर्व का नाम पौलोम लिखा है, यद्यपि कथा आस्तीक पर्व की है।

सौतिरुवाच

26.1

एवं स्तुतस्तदा कद्र्वा भगवान्हरिवाहनः ।
नीलजीमूतसंघातैः सर्वमम्बरमावृणोत्

evaṃ stutastadā kadrvā bhagavānharivāhanaḥ |
nīlajīmūtasaṃghātaiḥ sarvamambaramāvṛṇot

26.2

मेघानाज्ञापयामास वर्षध्वममृतं शुभम् ।
ते मेघा मुमुचुस्तोयं प्रभूतं विद्युदुज्ज्वलाः

meghānājñāpayāmāsa varṣadhvamamṛtaṃ śubham |
te meghā mumucustoyaṃ prabhūtaṃ vidyudujjvalāḥ

26.3

परस्परमिवात्यर्थं गर्जन्तः सततं दिवि ।
संवर्तितमिवाकाशं जलदैः सुमहाद्भुतैः

parasparamivātyarthaṃ garjantaḥ satataṃ divi |
saṃvartitamivākāśaṃ jaladaiḥ sumahādbhutaiḥ

26.4

सृजद्भिरतुलं तोयमजस्रं सुमहारवैः ।
संप्रनृत्तमिवाकाशं धारोर्मिभिरनेकशः

sṛjadbhiratulaṃ toyamajasraṃ sumahāravaiḥ |
saṃpranṛttamivākāśaṃ dhārormibhiranekaśaḥ

26.5

मेघस्तनितनिर्घोषौर्विद्युत्पवनकम्पितैः ।
तैर्मेघैः सततासारं वर्षद्भिरनिशं तदा

meghastanitanirghoṣaurvidyutpavanakampitaiḥ |
tairmeghaiḥ satatāsāraṃ varṣadbhiraniśaṃ tadā

26.6

नष्टचन्द्रार्ककिरणमम्बरं समपद्यत ।
नागानामुत्तमो हर्षस्तथा वर्षति वासवे

naṣṭacandrārkakiraṇamambaraṃ samapadyata |
nāgānāmuttamo harṣastathā varṣati vāsave

26.7

आपूर्यत मही चापि सलिलेन समन्ततः ।
रसातलमनुप्राप्तं शीतलं विमलं जलम् ।

āpūryata mahī cāpi salilena samantataḥ |
rasātalamanuprāptaṃ śītalaṃ vimalaṃ jalam |

26.8

तदा भूरभवच्छन्ना जलोर्मिभिरनेकशः ।
रामणीयकमागच्छन्मात्रा सह भुजंगमाः

tadā bhūrabhavacchannā jalormibhiranekaśaḥ |
rāmaṇīyakamāgacchanmātrā saha bhujaṃgamāḥ

पाठ का स्रोत: Wikisource · CC BY-SA 4.0 (Wikisource transcription of a public-domain text)