पूर्व खण्ड — आचार काण्ड

अध्याय 90: प्रम्लोचा द्वारा रुचि को कन्यादान

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे प्रम्लोचागमनं नाम नवतितमोऽध्यायः ॥

7 श्लोक · 90 में से 241

इस अध्याय में क्या होता है

प्रम्लोचा द्वारा रुचि को कन्यादान

मार्कण्डेय आगे कहते हैं। नदी के बीच से सुन्दर अप्सरा प्रम्लोचा प्रकट हुई और रुचि से मधुर वाणी में बोली। उसने बताया कि उसकी कृपा से वरुण के महात्मा पुत्र पुष्कर से उसकी एक अत्यन्त रूपवती कन्या उत्पन्न हुई है। उसने वह कन्या रुचि को पत्नी रूप में अर्पित की और कहा कि उससे महाबुद्धिमान मनु पुत्र रूप में जन्म लेगा। रुचि ने स्वीकार किया। प्रम्लोचा ने जल से मानिनी नाम की सुन्दर कन्या को निकाला, और उसी नदी के तट पर मुनि ने विधिपूर्वक उसका पाणिग्रहण किया। उससे महावीर और तेजस्वी पुत्र उत्पन्न हुआ, जो रुचि का पुत्र होने से रौच्य कहलाया, वही मनु जिनका वर्णन मार्कण्डेय पहले कर चुके थे। यह छोटा अध्याय, केवल सात श्लोकों का, रुचि की कथा को पूरा करता है।

मार्कण्डेय उवाच

90.1

ततस्तस्मान्नदीमध्यात्समुत्तस्थौ मनोरमा ।
प्रम्लौचा नाम तन्वङ्गी तत्समीपे वराप्सराः

tatastasmānnadīmadhyātsamuttasthau manoramā |
pramlaucā nāma tanvaṅgī tatsamīpe varāpsarāḥ

90.2

सा चोवाच महात्मानं रुचिं सुमधुराक्षरम् ।
प्रसादयामास भूयः प्रम्लोचा च वराप्सराः

sā covāca mahātmānaṃ ruciṃ sumadhurākṣaram |
prasādayāmāsa bhūyaḥ pramlocā ca varāpsarāḥ

90.3

अतीवरूपिणी कन्या मत्प्रसाद्वराङ्गना ।
जाता वरुणपुत्रेण पुष्करेण महात्मना

atīvarūpiṇī kanyā matprasādvarāṅganā |
jātā varuṇaputreṇa puṣkareṇa mahātmanā

90.4

तां गृहाण मया दत्तां भार्य्यार्थे वरवर्णिनीम् ।
मनुर्महामतिस्तस्यां समुत्पत्स्यति ते सुतः

tāṃ gṛhāṇa mayā dattāṃ bhāryyārthe varavarṇinīm |
manurmahāmatistasyāṃ samutpatsyati te sutaḥ

मार्कंडेय उवाच

90.5

तथेति तेन साप्युक्ता तस्मात्तोयाद्वपुष्मतीम् ।
उद्दधार ततः कन्यां मानिनीं नाम नामतः

tatheti tena sāpyuktā tasmāttoyādvapuṣmatīm |
uddadhāra tataḥ kanyāṃ māninīṃ nāma nāmataḥ

90.6

नद्याश्च पुलिने तस्मिन्स मुनिर्मुनिसत्तमाः ।
जग्राह पाणिं विधिवत्समानीय महामुनिः

nadyāśca puline tasminsa munirmunisattamāḥ |
jagrāha pāṇiṃ vidhivatsamānīya mahāmuniḥ

90.7

तस्यां तस्य सुतो जज्ञे महावीर्य्यो महाद्युतिः ।
रुचे रौच्य इति ख्यातो यो मया पूर्वमीरितः

tasyāṃ tasya suto jajñe mahāvīryyo mahādyutiḥ |
ruce raucya iti khyāto yo mayā pūrvamīritaḥ

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