चित्र: Dr Sandip Roy · CC BY 3.0
आनुवंशिकी · समाधि लगभग 2800–2300 ई.पू.; जीनोम 2019 में प्रकाशित

राखीगढ़ी का जीनोम

प्राप्ति
राखीगढ़ी, हिसार ज़िला, हरियाणा का हड़प्पाकालीन क़ब्रिस्तान; 2015 से वसन्त शिन्दे के नेतृत्व में डेक्कन कॉलेज द्वारा उत्खनन
अब कहाँ
कंकाल-अवशेष उत्खनन दल के पास; जीनोम के आँकड़े ‘सेल’ पत्रिका (2019) में प्रकाशित

सिन्धु–सरस्वती नगरों के किसी व्यक्ति से मिला पहला प्राचीन जीनोम, उस स्त्री का जो चार हज़ार वर्ष से भी पहले राखीगढ़ी में दफ़नाई गई थी।

यह क्या कहता है

घड़ों के साथ समाधि में लिटाई गई एक स्त्री के भीतरी कान की हड्डी से डीएनए निकाला गया। उसकी वंश-परम्परा दक्षिण एशिया की दो बहुत पुरानी धाराओं का मेल थी: एक धारा ईरान के आरम्भिक शिकारी-किसानों से सम्बन्धित, जो खेती शुरू होने से पहले ही उनसे अलग हो चुकी थी, और दूसरी दक्षिण एशिया के शिकारी-संग्राहकों की। उसमें मध्य एशियाई स्टेपी का कोई अंश नहीं था, न अनातोलिया के किसानों का।

यह क्या सिद्ध करता है

यह दिखाता है कि हड़प्पा नगरों के लोग दक्षिण एशिया में बहुत पहले से बसी वंश-धाराओं से थे और यहाँ की खेती मुख्यतः स्थानीय लोगों से पनपी। आज के अधिकतर भारतीयों में यही वंश-अंश है।

इनका प्रमाण