चित्र: Wikimedia Commons · Public domain
इतिवृत्त · 1 नवम्बर 1858

महारानी विक्टोरिया की 1858 की घोषणा

प्राप्ति
इलाहाबाद के दरबार में लॉर्ड कैनिंग ने पढ़ी, और देश भर में अनुवाद में सुनाई गई
अब कहाँ
ब्रिटिश और भारतीय सरकारी अभिलेखों में मुद्रित पाठ

वह घोषणा जिसके द्वारा 1857 के युद्ध के बाद ब्रिटिश ताज ने भारत का शासन ईस्ट इंडिया कम्पनी से अपने हाथ में लिया।

यह क्या कहता है

‘ईसाई धर्म के सत्य पर दृढ़ विश्वास रखते हुए और धर्म की सान्त्वना के लिए कृतज्ञ होकर, हम अपनी मान्यताएँ किसी भी प्रजा पर थोपने का अधिकार और इच्छा दोनों अस्वीकार करते हैं।’ अधिकारियों को आदेश है कि वे किसी भी प्रजा की धार्मिक आस्था या पूजा में कोई हस्तक्षेप न करें। यह ‘देशी राजाओं के अधिकार, मर्यादा और सम्मान का अपने समान आदर’ करने का, और ‘किसी भी जाति या मत’ की प्रजा को पद देने का वचन देती है।

यह क्या सिद्ध करता है

धर्म में हस्तक्षेप न करने का इसका वचन ताज की अपनी स्वीकारोक्ति है कि 1857 के विद्रोह के पीछे धर्म पर संकट का भय था।

इनका प्रमाण