పలుకే బంగారమాయెనా కోదండపాణి
పలుకే బంగారమాయె పిలిచిన పలుకవేమి
కలలో నీ నామస్మరణ మరువ చక్కని తండ్రి
ఇరువుగ ఇసుకలోన పొరలిన యుడుత భక్తికి
కరుణించి బ్రోచితివని నెర నమ్మితిని తండ్రి
రాతి నాతిగజేసి భూతలమందున ప్ర
ఖ్యాతి జెందితివని ప్రీతితో నమ్మితి తండ్రి
ఎంత వేడినను నీకు సుంతైన దయరాదు
పంతము చేయ నేనెంతవాడను తండ్రి
శరణాగత త్రాణ బిరుదాంకితుడవుగావా
కరుణించు భద్రాచల వర రామదాస పోష
पलुके बंगारमायॆना कोदंडपाणि
पलुके बंगारमायॆ पिलिचिन पलुकवेमि
कललो नी नामस्मरण मरुव चक्कनि तंड्रि
इरुवुग इसुकलोन पॊरलिन युडुत भक्तिकि
करुणिंचि ब्रोचितिवनि नॆर नम्मितिनि तंड्रि
राति नातिगजेसि भूतलमंदुन प्र
ख्याति जॆंदितिवनि प्रीतितो नम्मिति तंड्रि
ऎंत वेडिननु नीकु सुंतैन दयरादु
पंतमु चेय नेनॆंतवाडनु तंड्रि
शरणागत त्राण बिरुदांकितुडवुगावा
करुणिंचु भद्राचल वर रामदास पोष
palukē baṅgāramāyenā kōdaṇḍapāṇi
palukē baṅgāramāye pilicina palukavēmi
kalalō nī nāmasmaraṇa maruva cakkani taṇḍri
iruvuga isukalōna poralina yuḍuta bhaktiki
karuṇiñci brōcitivani nera nammitini taṇḍri
rāti nātigajēsi bhūtalamanduna pra
khyāti jenditivani prītitō nammiti taṇḍri
enta vēḍinanu nīku suntaina dayarādu
pantamu cēya nēnentavāḍanu taṇḍri
śaraṇāgata trāṇa birudāṅkituḍavugāvā
karuṇiñcu bhadrācala vara rāmadāsa pōṣa
अर्थ
पल्लवी: हे कोदण्डपाणि, क्या तुम्हारा एक बोल भी सोना हो गया है, कि तुम उसे खर्च नहीं करते?
1. क्या तुम्हारा बोल सोना हो गया? पुकारने पर भी उत्तर क्यों नहीं देते? सपने में भी मैं तुम्हारा नाम-स्मरण नहीं भूलता, हे सुन्दर पिता।
2. मैंने पूरा विश्वास किया कि तट की रेत में लोटती गिलहरी की भक्ति पर तुमने करुणा करके उसकी रक्षा की, हे पिता।
3. मैंने प्रेम से विश्वास किया कि तुमने पत्थर को नारी बना दिया और धरती पर बड़ी कीर्ति पाई, हे पिता।
4. कितनी भी विनती करूँ, तुम्हें ज़रा भी दया नहीं आती। तुमसे हठ करने वाला मैं कौन हूँ, हे पिता?
5. क्या तुम ‘शरणागतों के रक्षक’ की उपाधि वाले नहीं हो? करुणा करो, हे भद्राचल के स्वामी, रामदास के पालनहार।
इस भजन के बारे में
कञ्चर्ल गोपन्ना गोलकोण्डा के क़ुतुबशाही दरबार में तहसीलदार थे; उन्होंने गोदावरी तट पर भद्राचलम के राम मंदिर के पुनर्निर्माण में राजस्व का धन लगा दिया और इसके लिए कारागार में डाले गए। कोठरी में गाए उनके कीर्तन उस व्यक्ति के गीत हैं जिसने सब कुछ दे दिया और जिसे कोई उत्तर नहीं मिलता। परम्परा कहती है कि राम और लक्ष्मण सेवकों के वेश में सुल्तान अबुल हसन तानाशाह के पास आए और सोने के सिक्कों में धन लौटा दिया, और गोपन्ना मुक्त हुए। पलुके बंगारमायॆना उनकी शिकायतों में सबसे कोमल है: क्या तुम्हारा एक बोल भी सोने-सा इतना कीमती हो गया कि उसे भी नहीं देते? आनन्दभैरवी में गाया जाने वाला यह कीर्तन हर राम नवमी पर भद्राचलम में सीता-राम कल्याणम् के समय सुनाई देता है।
Telugu text: te.wikisource.org, రామదాసు కీర్తనలు, ‘పలుకే బంగారమాయెనా’ (ఆనందభైరవి, ఆది; public-domain printed collection); checked against karnatik.com c1435