हरि नांव हीरा हरि नांव हीरा।
हरि नांव लेत मिटै सब पीरा॥

हरि नांव जाती हरि नांव पांती।
हरि नांव सकल जीवन मैं क्रांती॥

हरि नांव सकल सुषन की रासी।
हरि नांव काटै जम की पासी॥

हरि नांव सकल भुवन ततसारा।
हरि नांव नामदेव उतरे पारा॥

अर्थ

हरि का नाम हीरा है, हरि का नाम हीरा है। हरि का नाम लेते ही सब पीड़ा मिट जाती है।

हरि का नाम ही मेरी जाति है, हरि का नाम ही मेरी पंक्ति है। हरि का नाम सारे जीवन में प्रकाश है।

हरि का नाम सब सुखों का भंडार है। हरि का नाम यम का फंदा काट देता है।

हरि का नाम सारे लोकों का सार है। हरि के नाम से ही नामदेव पार उतरे।

इस भजन के बारे में

यह नामदेव का एक हिंदी पद है, जो उत्तर भारत में संकलित उनके पदों में सुरक्षित है। यह अपने सबसे सरल रूप में नाम-संकीर्तन है: “हरि नांव” हर अर्धाली के आरंभ में दोहराया जाता है, ताकि गाने वाला नाम का वर्णन करते हुए भी नाम ही जपता रहे। “हरि नांव जाती हरि नांव पांती” पंक्ति उन लोगों को नामदेव का उत्तर है जो उन्हें जन्म से परखते थे।

Namdev, Hindi padavali, pada 1 (raga Todi); text as on Kavita Kosh