ಭಾಗ್ಯದ ಲಕ್ಷ್ಮೀ ಬಾರಮ್ಮ ನಮ್ಮಮ್ಮ ನೀ
ಸೌಭಾಗ್ಯದ ಲಕ್ಷ್ಮೀ ಬಾರಮ್ಮ
ಹೆಜ್ಜೆಯ ಮೇಲೆ ಹೆಜ್ಜೆಯನಿಕ್ಕುತ
ಗೆಜ್ಜೆ ಕಾಲ್ಗಳ ಧ್ವನಿಯ ತೋರುತ
ಸಜ್ಜನ ಸಾಧು ಪೂಜೆಯ ವೇಳೆಗೆ
ಮಜ್ಜಿಗೆಯೊಳಗಿನ ಬೆಣ್ಣೆಯಂತೆ
ಕನಕವೃಷ್ಟಿಯ ಕರೆಯುತ ಬಾರೆ
ಮನಕಾಮನೆಯ ಸಿದ್ಧಿಯ ತೋರೆ
ದಿನಕರ ಕೋಟಿ ತೇಜದಿ ಹೊಳೆಯುವ
ಜನಕರಾಯನ ಕುಮಾರಿ ಬೇಗ
ಅತ್ತಿತ್ತಗಲದೆ ಭಕ್ತರ ಮನೆಯಲಿ
ನಿತ್ಯ ಮಹೋತ್ಸವ ನಿತ್ಯ ಸುಮಂಗಲ
ಸತ್ಯವ ತೋರುವ ಸಾಧು ಸಜ್ಜನರ
ಚಿತ್ತದಿ ಹೊಳೆಯುವ ಪುತ್ಥಳಿ ಬೊಂಬೆ
ಸಂಖ್ಯೆಯಿಲ್ಲದ ಭಾಗ್ಯವ ಕೊಟ್ಟು
ಕಂಕಣ ಕೈಯ ತಿರುವುತ ಬಾರೆ
ಕುಂಕುಮಾಂಕಿತೆ ಪಂಕಜಲೋಚನೆ
ವೆಂಕಟರಮಣನ ಬಿಂಕದ ರಾಣಿ
ಸಕ್ಕರೆ ತುಪ್ಪದ ಕಾಲುವೆ ಹರಿಸಿ
ಶುಕ್ರವಾರದ ಪೂಜೆಯ ವೇಳೆಗೆ
ಅಕ್ಕರೆಯುಳ್ಳ ಅಳಗಿರಿ ರಂಗನ
ಚೊಕ್ಕ ಪುರಂದರವಿಠ್ಠಲನ ರಾಣಿ
भाग्यद लक्ष्मी बारम्म नम्मम्म नी
सौभाग्यद लक्ष्मी बारम्म
हॆज्जॆय मेलॆ हॆज्जॆयनिक्कुत
गॆज्जॆ काल्गळ ध्वनिय तोरुत
सज्जन साधु पूजॆय वेळॆगॆ
मज्जिगॆयॊळगिन बॆण्णॆयंतॆ
कनकवृष्टिय करॆयुत बारॆ
मनकामनॆय सिद्धिय तोरॆ
दिनकर कोटि तेजदि हॊळॆयुव
जनकरायन कुमारि बेग
अत्तित्तगलदॆ भक्तर मनॆयलि
नित्य महोत्सव नित्य सुमंगल
सत्यव तोरुव साधु सज्जनर
चित्तदि हॊळॆयुव पुत्थळि बॊंबॆ
संख्यॆयिल्लद भाग्यव कॊट्टु
कंकण कैय तिरुवुत बारॆ
कुंकुमांकितॆ पंकजलोचनॆ
वॆंकटरमणन बिंकद राणि
सक्करॆ तुप्पद कालुवॆ हरिसि
शुक्रवारद पूजॆय वेळॆगॆ
अक्करॆयुळ्ळ अळगिरि रंगन
चॊक्क पुरंदरविठ्ठलन राणि
bhāgyada lakṣmī bāramma nammamma nī
saubhāgyada lakṣmī bāramma
hejjeya mēle hejjeyanikkuta
gejje kālgaḷa dhvaniya tōruta
sajjana sādhu pūjeya vēḷege
majjigeyoḷagina beṇṇeyante
kanakavṛṣṭiya kareyuta bāre
manakāmaneya siddhiya tōre
dinakara kōṭi tējadi hoḷeyuva
janakarāyana kumāri bēga
attittagalade bhaktara maneyali
nitya mahōtsava nitya sumaṅgala
satyava tōruva sādhu sajjanara
cittadi hoḷeyuva putthaḷi bombe
saṅkhyeyillada bhāgyava koṭṭu
kaṅkaṇa kaiya tiruvuta bāre
kuṅkumāṅkite paṅkajalōcane
veṅkaṭaramaṇana biṅkada rāṇi
sakkare tuppada kāluve harisi
śukravārada pūjeya vēḷege
akkareyuḷḷa aḷagiri raṅgana
cokka purandaraviṭhṭhalana rāṇi
अर्थ
पल्लवी: आओ भाग्य की लक्ष्मी, हमारी माँ, आओ; सौभाग्य की लक्ष्मी, आओ।
1. एक पग के बाद दूसरा पग रखती, पायल के घुँघरुओं की ध्वनि सुनाती, सज्जनों और साधुओं की पूजा की बेला में ऐसे आओ जैसे छाछ में से मक्खन ऊपर आता है।
2. स्वर्ण की वर्षा करती आओ, मन की कामनाओं की सिद्धि दिखाओ; करोड़ सूर्यों के तेज से दमकती राजा जनक की पुत्री, शीघ्र आओ।
3. इधर-उधर गए बिना भक्तों के घर में बसो, जहाँ नित्य उत्सव है और नित्य मंगल; सत्य दिखाने वाले साधु-सज्जनों के चित्त में चमकने वाली तुम सोने की छोटी प्रतिमा हो।
4. अनगिनत भाग्य देती हुई, हाथ के कंगन घुमाती आओ; कुंकुम से अलंकृत, कमलनयनी, वेंकटरमण की गर्वीली रानी।
5. शक्कर और घी की नहरें बहाती हुई, शुक्रवार की पूजा की बेला में आओ; स्नेहमय अळगिरि रंग की, सुंदर पुरंदर विट्ठल की रानी।
इस भजन के बारे में
कर्नाटक में यह शुक्रवार के दीपक का गीत है। स्त्रियाँ इसे श्रावण के वरमहालक्ष्मी व्रत में, दीपावली पर और नई बहू या नए घर के स्वागत में गाती हैं, पायल की रुनझुन के साथ महालक्ष्मी को घर बुलाती हैं। पुरंदरदास उन्हें किसी दूर के सिंहासन पर नहीं बिठाते। वे पग-पग चलकर आती हैं, जैसे मथी हुई मटकी में मक्खन ऊपर आता है, और उस घर में रहती हैं जहाँ प्रेम से पूजा होती है। अंतिम पद उन्हें दो बार विष्णु की रानी कहता है, पर्वत के वेंकटरमण की और पुरंदर विट्ठल की, जो दास जी की अपनी मुद्रा है। संगीत सभाओं में यह मध्यमावती राग में गाया जाता है; कुछ परंपराएँ श्री राग लेती हैं।
Kannada Wikisource, ‘ಭಾಗ್ಯದ ಲಕ್ಷ್ಮೀ ಬಾರಮ್ಮ’ (Purandara Dasa); checked line by line against karnatik.com c1146 and c4682 (Madhyamavati / Shri, Adi tala)
