गागरोन का युद्ध

विजेतामेवाड़, मेदिनी राय के योद्धाओं सहितराणा साँगा
1519 ई.बनाम
पक्षमालवा सल्तनतमहमूद खिलजी द्वितीय

महमूद खिलजी द्वितीय ने गागरोन घेरा, जो उसके पूर्व मन्त्री मेदिनी राय के लोगों के पास था; मेदिनी राय मेवाड़ से जा मिले थे। साँगा दुर्ग की रक्षा को आए और सुल्तान को पकड़ लिया।

तिथि: 1519 ई.स्थान: गागरोन, झालावाड़ के पास, राजस्थानप्रकार: युद्ध
चित्र: Ravikrishnan A K · CC BY-SA 4.0
परिणाम

मालवा की सेना पराजित हुई और सुल्तान महमूद खिलजी द्वितीय बन्दी बना; बाद में साँगा ने उसे छोड़ दिया।

01जल दुर्ग

गागरोन वहाँ खड़ा है जहाँ कालीसिंध और आहू मिलती हैं, तीन ओर पानी है। मालवा का शासन चलाने वाले राजपूत मेदिनी राय का अपने सुल्तान से विरोध हुआ और उन्होंने साँगा की शरण ली, जिन्होंने उन्हें चन्देरी और गागरोन दिए। जब महमूद गागरोन पर चढ़ा, साँगा तेज़ी से सेना लेकर पहुँचे और घेरा डालने वालों को तोड़ दिया। सुल्तान घायल होकर पकड़ा गया।

02उदारता की स्मृति

साँगा ने घायल सुल्तान का चित्तौड़ में उपचार करवाया और कुछ महीनों बाद उसे मुक्त कर उसका राज्य कुछ भाग सहित लौटा दिया। मेवाड़ इसे राजपूत उदारता के रूप में याद करता है; फ़रिश्ता और बाद के इतिहासकार भी इस मुक्ति का उल्लेख करते हैं। ज़मानत के रूप में सुल्तान का एक पुत्र चित्तौड़ में रखा गया। इस उदारता से स्थायी शान्ति नहीं मिली: साँगा के बाद मालवा गुजरात के साथ मेवाड़ के विरुद्ध खड़ा हुआ, और आगे चलकर बहादुरशाह ने मालवा को ही निगल लिया।

राणा सांगा
व्यक्तित्व · 1482–1528 ई.; शासन 1508–1528राणा सांगासंग्राम सिंह ने दिल्ली के लोदी सुल्तान और मालवा के सुल्तान को हराया, अपने युग के सबसे बड़े राजपूत संघ का नेतृत्व किया और मार्च 1527 में खानवा में बाबर से लड़े; उनके शरीर पर लगभग अस्सी घावों के निशान थे।पढ़ें →
महत्त्व

खातोली के साथ गागरोन ने बाबर के आक्रमण से ठीक पहले मेवाड़ को दिल्ली और गुजरात के बीच सबसे बलवान राज्य बना दिया।