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राज राजेश्वर मन्दिर, वेमुलवाडा

तेलंगाना की दक्षिण काशी, वेमुलवाडा चालुक्यों की पुरानी राजधानी, जहाँ भक्त कोडे मोक्कु की रीति से राजन्ना को बछड़ा अर्पित करते हैं।

निर्माण: वेमुलवाडा चालुक्यों का मन्दिर-नगर, 8वीं–10वीं शताब्दी; बाद की शताब्दियों में विस्तारस्थान: तेलंगाना (राजन्ना सिरसिल्ला जिला)देवता: भगवान शिव राज राजेश्वर (राजन्ना), देवी राज राजेश्वरी के साथ18.47° N, 78.87° E
  1. 10वीं शताब्दी
चित्र: Thistheyear2023 · CC BY-SA 4.0

01राजन्ना और बछड़ा

उत्तर तेलंगाना के किसान परिवारों के लिए यहाँ शिव बस राजन्ना हैं, राजा। सबसे प्रसिद्ध मन्नत कोडे मोक्कु है: जिस परिवार ने स्वास्थ्य या अच्छी फ़सल की प्रार्थना की हो, वह एक युवा बछड़े को मन्दिर की परिक्रमा कराकर भगवान को सौंप देता है, और बछड़े मन्दिर की गोशाला में रखे जाते हैं। धर्मगुण्डम, मन्दिर का सरोवर, जहाँ तीर्थयात्री पहले स्नान करते हैं। महाशिवरात्रि पर नगर तीर्थयात्रियों से भर जाता है, और यह मन्दिर राज्य के सबसे अधिक दर्शन वाले मन्दिरों में है।

02वेमुलवाडा चालुक्यों की राजधानी

8वीं से 10वीं शताब्दी तक वेमुलवाडा एक चालुक्य शाखा का केन्द्र था, जो राष्ट्रकूटों के सामन्त के रूप में इस प्रदेश पर राज करती थी। उनके राजा अरिकेसरी द्वितीय कन्नड़ कवि पम्प के संरक्षक थे। मुख्य मन्दिर के चारों ओर उनके समय के भीमेश्वर, नगरेश्वर आदि मन्दिर हैं, और यहाँ इस वंश के अभिलेख मिले हैं। मन्दिर-परिसर में एक सूफ़ी सन्त की दरगाह भी है, जहाँ दोनों आस्थाओं के लोग जाते हैं।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. 10वीं शताब्दीपम्प के संरक्षक अरिकेसरी द्वितीय के समय वेमुलवाडा चालुक्यों की राजधानी है।
दर्शन और यात्रा

करीमनगर से लगभग 35 किमी पश्चिम और हैदराबाद से 150 किमी उत्तर।