आज भी खड़ा

तीर्थपुरीश्वरर मन्दिर, तिरुनेल्वायिल अरत्तुऱै (तिरुवट्टत्तुऱै)

जहाँ शिव ने बालक सम्बन्दर को मोतियों की पालकी, छत्र और तुरहियाँ दीं, ताकि उनके नन्हे पैरों को लम्बे मार्ग पैदल न चलने पड़ें। तेवारम के तीनों सन्तों ने इसे गाया।

निर्माण: तोऴुदूर–वृद्धाचलम मार्ग पर पाँच तल के गोपुर वाला मन्दिरस्थान: तमिलनाडु (कडलूर ज़िला, वेल्लारु नदी पर)देवता: भगवान शिव तीर्थपुरीश्वरर (अरत्तुऱैनाथ, आनन्दीश्वर) रूप में; देवी आनन्द नायकी (अरत्तुऱै नायकी)11.38° N, 79.19° E
चित्र: பா.ஜம்புலிங்கம் · CC0

01मोतियों की पालकी

पेरिय पुराणम बताता है कि बालक सम्बन्दर एक धाम से दूसरे धाम पैदल जाते थे, और अरत्तुऱै में स्वामी ने मन्दिर के पुजारियों को स्वप्न देकर उनके लिए मोतियों की पालकी, मोतियों का छत्र और मोतियों की तुरहियाँ तैयार करवाईं; तब से वे पालकी में चलते और आगे तुरहियाँ बजतीं। अप्पर, सम्बन्दर और सुन्दरर तीनों ने यहाँ एक-एक पदिगम गाया। सन्तों के जीवन संकलित करने और कहने वाले नम्बियाण्डार नम्बि और सेक्किऴार भी यहाँ के उपासक माने जाते हैं। महाशिवरात्रि, मार्गऴि तिरुवादिरै और पंगुनि उत्तिरम मनाए जाते हैं।

दर्शन और यात्रा

तोऴुदूर–वृद्धाचलम बस-मार्ग पर तोऴुदूर से लगभग 20 किमी।