01ऐयारु, पाँच नदियाँ
कावेरी डेल्टा की पाँच धाराएँ, अरिसिल, वेण्णार, वेट्टार, कुडमुरुट्टि और स्वयं कावेरी, नगर के पास से बहती हैं, और इसी से इसका नाम पड़ा। पाँच नदियों के स्वामी शिव, पञ्चनदीश्वर, का मंदिर अप्पर, सम्बन्दर और सुन्दरर ने गाया, और इसके पत्थर के मण्डपों पर चोलों के अभिलेख हैं। अप्पर ने यहीं कैलास-दर्शन का प्रसिद्ध पद गाया: कथा कहती है कि जब वे पर्वत तक न पहुँच सके तब शिव ने उन्हें तिरुवैयारु में ही कैलास दिखा दिया। चित्तिरै मास में सप्तस्थानम उत्सव में देवता को पास के छह देवालयों में ले जाया जाता है।
02त्यागराज की समाधि
तिरुवारूर में 1767 में जन्मे त्यागराज ने जीवन का अधिकांश भाग यहीं एक छोटे घर में बिताया, श्रीराम को गाते हुए और तंजावुर दरबार का आश्रय ठुकराते हुए। अंत में उन्होंने संन्यास लिया और जनवरी 1847 में पुष्य बहुल पञ्चमी को देह त्यागी, और कावेरी तट पर समाधि दी गई। 1925 में गायिका बेंगलूर नागरत्नम्मा ने अपनी बचत लगाकर उस पर देवालय बनवाया और उत्सव में स्त्री गायिकाओं के लिए द्वार खोला। हर वर्ष उसी तिथि पर वहाँ त्यागराज आराधना होती है, जब सैकड़ों संगीतकार पाँचों पञ्चरत्न कृतियाँ एक स्वर में गाते हैं।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- जनवरी 1847त्यागराज ने तिरुवैयारु में समाधि ली।
- 1925 ई.बेंगलूर नागरत्नम्मा ने समाधि पर देवालय बनवाया।
तंजावुर से लगभग 13 किमी उत्तर; आराधना जनवरी में होती है, और समाधि के पास के आसन भोर से पहले भर जाते हैं।





