आज भी खड़ा

अऴगिय नम्बिरायर मन्दिर, तिरुक्कुरुंगुडि

पश्चिमी घाट की तलहटी का दिव्य देशम, भक्त नम्बडुवान की कैशिक कथा का स्थान, जिसका मंचन हर कैशिक एकादशी को मन्दिर में होता है।

निर्माण: आळ्वारों ने गाया; पाण्ड्य काल का मन्दिर, नायक काल की मूर्तिकलास्थान: तमिलनाडु (तिरुनेलवेली जिला)देवता: भगवान विष्णु नम्बि (अऴगिय नम्बिरायर)8.44° N, 77.56° E
  1. आळ्वार काल
  2. नायक काल
चित्र: Donkey.tail · CC BY-SA 3.0

01नम्बडुवान का गान

वराह पुराण का कैशिक माहात्म्य नम्बडुवान की कथा कहता है, निम्न कुल का एक गायक जो हर रात मन्दिर के बाहर से नम्बि के लिए गाने आता था। एक एकादशी की रात रास्ते में एक ब्रह्मराक्षस ने उसे पकड़ लिया और खाना चाहा। नम्बडुवान ने केवल गान पूरा करने की अनुमति माँगी और लौटने का वचन दिया, और वह लौटा। उसकी सच्चाई से द्रवित होकर राक्षस ने कैशिक राग में उसके गान का पुण्य माँगा, और मुक्त हो गया। कार्तिगै की कैशिक एकादशी को यह कथा आज भी रात भर मन्दिर में कैशिक नाटकम के रूप में खेली जाती है, एक परम्परा जो पिछले दशकों में फिर जीवित हुई।

02नम्बि, नम्माळ्वार और रामानुज

श्रीवैष्णव परम्परा के अनुसार नम्माळ्वार की माता ने यहाँ नम्बि से सन्तान की प्रार्थना की थी, और एक बार स्वयं नम्बि ने शिष्य बनकर रामानुज से ज्ञान लिया, इसलिए वे वैष्णव नम्बि कहलाते हैं। पेरियाळ्वार, तिरुमंगै आळ्वार और नम्माळ्वार ने इस मन्दिर को गाया। इसके खम्भों और गोपुरमों पर दक्षिण की नायक काल की कुछ सबसे सुन्दर मूर्तिकला है। ऊपर वन में पहाड़ी पर दूसरे नम्बि, तिरुमलै नम्बि, विराजते हैं।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. आळ्वार कालनम्माळ्वार, पेरियाळ्वार और तिरुमंगै आळ्वार तिरुक्कुरुंगुडि को गाते हैं।
  2. नायक कालमूर्तिकला वाले मण्डप और गोपुरम जोड़े जाते हैं।
दर्शन और यात्रा

तिरुनेलवेली से लगभग 45 किमी दक्षिण, नांगुनेरी के पास। कैशिक एकादशी कार्तिगै (नवम्बर–दिसम्बर) में होती है।