आज भी खड़ा

नीणेरिनाथर मन्दिर, तिरुत्तण्डलै नीणेरि (तण्डलैच्चेरि)

उन ऊँचे माडक्कोयिल धामों में एक जिन्हें पेरिय पुराणम कोच्चेंगट चोल का बताता है। कथा कहती है कि यहीं पत्थर के नन्दी ने राजा की दूब की माला खा ली और उसका रोग चला गया।

निर्माण: कोच्चेंगट चोल का माडक्कोयिल (ऊँचे चबूतरे पर बना धाम), बाद की मरम्मत में बहुत बदलास्थान: तमिलनाडु (तिरुवारूर ज़िला, तिरुत्तुरैप्पूण्डि के पास)देवता: भगवान शिव नीणेरिनाथर रूप में; देवी ज्ञानाम्बिका10.56° N, 79.63° E
चित्र: பா.ஜம்புலிங்கம் · CC BY-SA 4.0

01चरने वाला पत्थर का बैल

अनेक शिव-धामों के निर्माता कोच्चेंगट चोल को चर्म रोग हुआ। एक वाणी ने कहा कि जहाँ पत्थर का बैल घास खाए, वहाँ रोग जाएगा। वे मन्दिर-मन्दिर गए, और तण्डलै में स्वामी के लिए अरुगम्पुल (दूब) की माला लेकर आए; गर्भगृह के सामने बैठे नन्दी ने उसे खींचकर खा लिया, और राजा स्वस्थ हो गया। सम्बन्दर ने यहाँ एक पदिगम गाया। बाद की सदियों में कवि पडिक्कासु पुलवर ने इन्हीं स्वामी पर सौ पदों का तण्डलैयार शतकम लिखा।

दर्शन और यात्रा

तिरुत्तुरैप्पूण्डि से तिरुवारूर मार्ग पर लगभग 4 किमी उत्तर, तण्डलैच्चेरि बस-ठहराव के पास।