आज भी खड़ा

कैच्चिनेश्वरर मन्दिर, तिरुक्कैच्चिनम (कच्चनम)

कै हाथ है। इन्द्र ने यहाँ बालू का लिंग बनाया, और जब उसे उठाया तो उनके हाथ की छाप उस पर रह गई। सम्बन्दर ने यह धाम गाया।

निर्माण: कोच्चेंगट चोल का माना जाने वाला माडक्कोयिल; मदुरै आधीनम के अधीनस्थान: तमिलनाडु (तिरुवारूर ज़िला, तिरुत्तुरैप्पूण्डि तालुका)देवता: भगवान शिव कैच्चिनेश्वरर रूप में; देवी वेल्वलै नायकी (पल्वलै नायकी)10.62° N, 79.67° E
चित्र: பா.ஜம்புலிங்கம் · CC BY-SA 4.0

01इन्द्र के हाथ की छाप

मन्दिर की कथा कहती है कि गौतम ऋषि से शापित इन्द्र ने पूजा के लिए यहाँ बालू का लिंग बनाया, और उसे हटाने लगे तो उनकी हथेली उसमें धँस गई; वह चिह्न आज भी स्वामी पर दिखाया जाता है। कहा जाता है कि अगस्त्य भी यहाँ एक भारी पाप से मुक्त हुए। मन्दिर में अर्धनारीश्वर का देवालय है और वृषभ पर बैठे दक्षिणामूर्ति हैं। तिरुक्कार्तिगै और महाशिवरात्रि यहाँ के बड़े दिन हैं। यह मदुरै आधीनम की देखरेख वाले मन्दिरों में है।

दर्शन और यात्रा

तिरुवारूर से लगभग 19 किमी, वलिवलम से 5 किमी; तिरुवारूर से नगर-बसें चलती हैं।