01रियासतों को जोड़ने वाले
1947 में नए भारत की सीमा के भीतर 560 से अधिक रियासतें थीं, जिनमें से प्रत्येक क़ानूनन चुनने को स्वतंत्र थी। गृह मंत्री और रियासत मंत्री के रूप में पटेल और उनके सचिव वी. पी. मेनन ने दो वर्षों के भीतर लगभग सबको भारत में मिला लिया, समझा-बुझाकर, विलय-पत्र से, और जूनागढ़ तथा हैदराबाद में बल से। प्रतिमा का नाम इसी काम पर है। इसकी ऊँचाई 182 मीटर गुजरात विधानसभा की सीटों की संख्या के बराबर है।
02गाँवों का लोहा
प्रतिमा का प्रस्ताव 2010 में आया और 31 अक्टूबर 2013 को इसकी नींव रखी गई। इसके लिए देश भर के गाँवों से खेती के पुराने लोहे के औज़ार इकट्ठा करने का अभियान चला, बारडोली के किसान नेता पटेल की स्मृति में। आकृति धोती और शॉल में चलते हुए खड़ी है; भीतर कंक्रीट और इस्पात का ढाँचा है, ऊपर काँसे की पट्टियाँ। रूपरेखा मूर्तिकार राम वी. सुतार ने बनाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2018 को अनावरण किया। लगभग 153 मीटर की ऊँचाई पर दर्शक दीर्घा से बाँध और सतपुड़ा-विंध्य की पहाड़ियाँ दिखती हैं।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- 31 अक्टूबर 2013नींव का पत्थर रखा गया।
- 31 अक्टूबर 2018पटेल की जयंती पर प्रतिमा का अनावरण हुआ।
सोमवार को बंद; एकता नगर (केवड़िया) का अपना रेलवे स्टेशन है, और वडोदरा लगभग 90 किमी दूर है।





