उत्खनित

शोर्तुगई

हड़प्पा सभ्यता की सबसे उत्तरी ज्ञात बस्ती, कोकचा के पास आमू दरिया पर, सिंधु से सैकड़ों किलोमीटर दूर। इसे बदख़्शाँ के लाजवर्द तक पहुँचने के लिए बसाया गया था।

निर्माण: सिंधु–सरस्वती सभ्यता की व्यापारिक बस्ती, लगभग 2500–2000 ई.पू.स्थान: तख़ार प्रांत, आमू दरिया के तट पर, Afghanistan37.35° N, 69.50° E
  1. लगभग 2500–2000 ई.पू.
  2. 1975 ई.
  3. 1977 ई. से
चित्र: Udimu · CC BY-SA 3.0

01वंक्षु पर हड़प्पा का नगर

एक फ़्रांसीसी पुरातत्व दल ने 1975 में यह स्थान खोजा, और 1977 से आंरी-पॉल फ़्रांकफ़ोर ने यहाँ उत्खनन किया। धरती से जो निकला वह स्पष्टतः हड़प्पा का था: सिंधु घाटी के आकारों और चित्रों वाले बर्तन, हड़प्पा के मानक 1:2:4 अनुपात की ईंटें, कार्नेलियन के मनके, और गैंडे तथा सिंधु लिपि के चिह्नों वाली एक चौकोर मुहर। कोकचा से निकाली नहरों से गेहूँ और जौ उगाए जाते थे। बस्ती छोटी थी, कुछ ही हेक्टेयर, पर उसकी बसावट और व्यवस्था गुजरात और सिंध के नगरों जैसी ही थी।

02इतनी दूर उत्तर क्यों

हड़प्पा के मनकों और जड़ाई में प्रयुक्त गहरा नीला लाजवर्द बदख़्शाँ में सर-ए-संग की खानों से आता है, जो शोर्तुगई से कोकचा घाटी में ऊपर हैं। टिन और सोने का व्यापार भी इसी प्रदेश से होता था। शोर्तुगई बताता है कि हड़प्पावासी ऐसी वस्तुओं के अपने पास पहुँचने की राह नहीं देखते थे; उन्होंने स्रोत पर ही अपने लोगों की बस्ती बसा दी, हड़प्पा से लगभग 1,000 किमी दूर। बाद की परतों में हड़प्पा का रूप धुँधला पड़ता है और मध्य एशिया की स्थानीय रीतियाँ आ जाती हैं।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. लगभग 2500–2000 ई.पू.कोकचा के पास आमू दरिया पर हड़प्पा की बस्ती फली-फूली।
  2. 1975 ई.एक फ़्रांसीसी पुरातत्व दल ने स्थान खोजा।
  3. 1977 ई. सेआंरी-पॉल फ़्रांकफ़ोर ने बस्ती का उत्खनन किया।