01पहाड़ियों के साँवले प्रभु
शामळिया यानी साँवला। गर्भगृह में गदाधारी विष्णु की काले पत्थर की मूर्ति है, और अरावली के भील और गरासिया लोग उन्हें उतना ही अपना देवता मानते हैं जितना मैदानों से आने वाले वैष्णव। मन्दिर ऊँची जगती पर खड़ा है, दीवारों पर हाथी, विष्णु के रूप और रामायण-महाभारत के दृश्य, ऊपर ऊँचा नागर शिखर। कार्तिक पूर्णिमा का मेला गुजरात और राजस्थान के आदिवासी परिवारों को कई दिनों तक मेश्वो स्नान और दर्शन के लिए खींच लाता है।
02गुप्तकालीन मूर्तिकला
शामळाजी और पास के देवनी मोरी में उत्खनन और संयोग से मिली वस्तुओं में गुप्तकाल की धूसर शिस्ट पत्थर की प्रतिमाएँ निकलीं: विश्वरूप विष्णु, मातृकाएँ, स्कन्द, गणेश। इनमें से अनेक अब बड़ौदा संग्रहालय और मुम्बई के छत्रपति शिवाजी महाराज वस्तु संग्रहालय में हैं। ये बताती हैं कि यहाँ की पूजा वर्तमान मन्दिर से बहुत पुरानी है। देवनी मोरी में 1959 से 1963 के बीच महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा के उत्खनन में एक बौद्ध स्तूप और विहार भी मिला, साथ में अभिलेखयुक्त धातु-पात्र।
राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर, अहमदाबाद से लगभग 125 कि.मी. उत्तर-पूर्व। मेला देखना हो तो कार्तिक पूर्णिमा पर जाइए।




