आज भी खड़ा

हाटकेश्वर महादेव मन्दिर, वडनगर

नागर ब्राह्मणों के कुलदेवता, वडनगर में स्वयम्भू लिंग, उस पुराने नगर में जिसे स्कन्द पुराण का नागर खण्ड हाटकेश्वर क्षेत्र का चमत्कारपुर कहता है। इसकी बाहरी दीवारें नक्काशी से भरी हैं।

निर्माण: प्राचीन क्षेत्र का स्वयम्भू लिंग; आज के नक्काशीदार मन्दिर का समय 15वीं या 17वीं शताब्दी बताया जाता हैस्थान: गुजरात (मेहसाणा ज़िला)देवता: हाटकेश्वर रूप में भगवान शिव, नागर ब्राह्मणों के कुलदेवता23.79° N, 72.63° E
चित्र: Bhadreshvyasa (talk).The original uploader was Bhadreshvyasa · CC BY-SA 3.0

01हाटकेश्वर क्षेत्र

स्कन्द पुराण का छठा भाग, नागर खण्ड, लगभग पूरा इसी प्रदेश को समर्पित है: हाटकेश्वर क्षेत्र, उसके तीर्थ, और चमत्कारपुर नगर, जिसे नागर ब्राह्मण वडनगर मानते हैं, उनके अपने नाम वाला पुराना नगर। हाटक का अर्थ है स्वर्ण, और हाटकेश्वर स्वर्ण के स्वामी हैं। नागर जहाँ भी गए, जूनागढ़ हो या काशी या संसार का दूसरा छोर, हाटकेश्वर उनके कुलदेवता हैं, और जहाँ-जहाँ नागर परिवार बसे, वहाँ हाटकेश्वर के मन्दिर बने। गर्भगृह का लिंग स्वयम्भू माना जाता है, किसी हाथ ने स्थापित नहीं किया।

02नक्काशी से भरी दीवारें

मन्दिर ऊँची दीवार के भीतर पूर्वमुखी है। गर्भगृह के ऊपर ऊँचा शिखर उठता है, और एक बड़ा मण्डप उस तक ले जाता है। बाहरी दीवारें अधिष्ठान से कंगनी तक तराशी हुई हैं: नवग्रह, दिक्पाल, प्रमुख देव, श्रीकृष्ण के जीवन के दृश्य, पाण्डव, रामायण और महाभारत के प्रसंग, गायक-वादक और अप्सराएँ, हाथी और फूलों वाली बेलें। आज के भवन का समय निश्चित नहीं है; गुजरात पर्यटन विभाग 17वीं शताब्दी कहता है, अन्य वृत्तान्त 15वीं, और क्षेत्र स्वयं उससे बहुत पुराना है। उसी परिसर में पुराना काशी विश्वेश्वर का स्थान, एक स्वामिनारायण मन्दिर और दो जैन मन्दिर हैं।

दर्शन और यात्रा

मन्दिर वडनगर नगर के छोर पर, कीर्ति तोरण और शर्मिष्ठा सरोवर के पास है; वडनगर का अपना स्टेशन है। महाशिवरात्रि और श्रावण के सोमवारों को नागर परिवार आते हैं।