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पुरुहूतिका देवी और कुक्कुटेश्वर मन्दिर, पीठापुरम

‘पीठिकायां पुरुहूतिका’: अठारह महाशक्तिपीठों में एक, जो कुक्कुटेश्वर रूप में भगवान शिव के मन्दिर के भीतर है। पीठापुरम तीन गयाओं में पादगया भी है और दत्त परम्परा के श्रीपाद श्रीवल्लभ का जन्मस्थान भी।

निर्माण: प्राचीन क्षेत्र; वर्तमान कुक्कुटेश्वर परिसर में पुरुहूतिका का मन्दिर और पादगया सरोवर हैंस्थान: आन्ध्र प्रदेश (काकीनाडा ज़िला)देवता: देवी पुरुहूतिका; भगवान शिव कुक्कुटेश्वर रूप में, राजराजेश्वरी के साथ17.11° N, 82.25° E
चित्र: Adityamadhav83 · CC BY 4.0

01पुरुहूतिका

पुरुहूत इन्द्र का नाम है, और यहाँ की परम्परा कहती है कि इन्द्र ने इसी स्थान पर देवी की आराधना की, इसलिए वे पुरुहूतिका कहलाईं। सुदर्शन चक्र से खण्डित सती की देह की कथा में ग्रन्थ पीठापुरम के लिए अलग-अलग अंग बताते हैं: मन्दिर की परम्परा और अनेक भक्ति-सूचियाँ पीठ अर्थात् कटि-भाग बताती हैं, जिससे नगर का नाम पड़ा; कुछ बायाँ हाथ बताते हैं। देवी के हाथों में बीज-पात्र, परशु, कमल और मधु-पात्र हैं। नगर का नाम पीठिका वही शब्द है जो अष्टादश स्तोत्र में आता है।

02पादगया

गया माहात्म्य गयासुर की कथा कहता है, जिसकी देह इतनी पवित्र थी कि जो उसे देखता, स्वर्ग पा जाता। देवताओं ने उसकी देह पर यज्ञ करना चाहा और भगवान विष्णु ने अपने चरण से उसे स्थिर किया। उसकी देह तीन स्थानों पर मानी जाती है: बिहार के गया में शिरोगया, ओडिशा के जाजपुर में नाभिगया और यहाँ पीठापुरम में पादगया। यात्री पादगया सरोवर में स्नान करते हैं और गया की भाँति उसकी सीढ़ियों पर पितरों को पिण्ड अर्पित करते हैं।

03श्रीपाद श्रीवल्लभ

दत्त सम्प्रदाय का मराठी ग्रन्थ गुरुचरित्र बताता है कि उसके अनुसार कलियुग में दत्तात्रेय के प्रथम अवतार श्रीपाद श्रीवल्लभ पीठापुरम में आपलराज और सुमति के घर जन्मे, और बाद में कृष्णा तट के कुरवपुर में रहे और वहीं देह त्यागी। नगर में उनके जन्मस्थान पर बना दत्त मन्दिर देवी के यात्रियों के साथ महाराष्ट्र और कर्नाटक के भक्तों को भी बुलाता है।

दर्शन और यात्रा

पीठापुरम काकीनाडा से लगभग 20 किलोमीटर है और सामलकोट हावड़ा–चेन्नई रेलमार्ग पर है। पादगया में स्नान करें, कुक्कुटेश्वर के दर्शन करें, फिर उसी परिसर में पुरुहूतिका के।