01पहाड़ी पर व्रत
स्कन्द पुराण की सत्यनारायण कथा पूरे भारत के हिन्दू घरों में पूर्णिमा, विवाह और गृहप्रवेश पर पढ़ी जाती है। अन्नवरम उसका अपना मन्दिर है। दम्पति हज़ारों की संख्या में आते हैं, कभी लम्बे मण्डपों में सैकड़ों एक साथ, मन्दिर के पुजारियों के साथ व्रत करने और गेहूँ, घी और गुड़ का प्रसाद घर ले जाने। गोदावरी जिलों में नवविवाहित दम्पति इसे अपनी पहली तीर्थयात्रा बनाते हैं। अन्नवरम का अर्थ है जो माँगो वह मिले।
02रत्नगिरि पर प्राप्ति
मन्दिर का वृत्तान्त कहता है कि 1891 में भगवान ने ज़मींदार राजा आई. वी. रामनारायणम और एक स्थानीय भक्त को स्वप्न दिया, और पहाड़ी पर मूर्ति मिली, जिसकी उसी वर्ष श्रावण शुद्ध विदिया को स्थापना हुई। गर्भगृह में एक ऊँची मूर्ति है जिसमें बीच में विष्णु, ऊपर शिव और नीचे ब्रह्मा हैं, तीनों का एक रूप। पहियों और घोड़ों से सजे आधार वाला वर्तमान मन्दिर 20वीं शताब्दी में बाद में बना।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- 1891रत्नगिरि पहाड़ी पर मूर्ति मिलती है और स्थापित होती है।
विशाखापत्तनम–विजयवाड़ा रेल मार्ग पर अन्नवरम का अपना स्टेशन है; पहाड़ी पर घाट मार्ग और सीढ़ियाँ जाती हैं।




