01सातवाहनों का नगर
प्रतिष्ठान सातवाहन राजाओं का केन्द्र था, जिन्होंने लगभग चार सदियों तक दक्कन पर राज किया और पश्चिम के शकों से युद्ध किए; गौतमीपुत्र सातकर्णि इनमें सबसे प्रसिद्ध हैं। यूनानी ‘पेरिप्लस ऑफ़ द एरिथ्रियन सी’ और टॉलेमी दोनों इसका नाम, पैठाना और बैठाना, एक भीतरी मंडी के रूप में लेते हैं जहाँ से माल घाटों से होकर भरुकच्छ बंदरगाह जाता था। परंपरा महाराष्ट्र के पंचांग में आज भी चलने वाले शालिवाहन शक को प्रतिष्ठान के एक सातवाहन राजा से जोड़ती है।
02एकनाथ का पैठण
1533 में यहीं जन्मे संत एकनाथ ने मराठी में एकनाथी भागवत और भावार्थ रामायण लिखे और ज्ञानेश्वरी का वह शुद्ध पाठ तैयार किया जो आज पढ़ा जाता है। वे अपने घर से भूखों को भोजन देते और प्यासे अछूत बालक को गोद में उठा लेते थे, और उनके भारूड आज भी गाँवों में गाए जाते हैं। 1599 में फाल्गुन वद्य षष्ठी को, जिसे नाथ षष्ठी कहते हैं, उन्होंने गोदावरी में जल-समाधि ली; उस दिन लाखों लोग नदी-तट पर उनकी समाधि पर आते हैं। सोने की ज़री वाली पैठणी रेशमी साड़ियाँ यहाँ सदियों से बुनी जाती हैं।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- लगभग 1ली शताब्दी ई.पू.प्रतिष्ठान सातवाहन राजधानी।
- 1533पैठण में संत एकनाथ का जन्म।
- 1599 (फाल्गुन वद्य 6)संत एकनाथ ने गोदावरी में समाधि ली।
छत्रपति संभाजीनगर से लगभग 50 किमी दक्षिण। फाल्गुन में नाथ षष्ठी का बड़ा मेला होता है; जायकवाडी बाँध और पक्षी अभयारण्य थोड़ा ऊपर की ओर हैं।






