01भद्रेश्वर की घाटी
राजा भद्रवर्मन प्रथम ने चौथी शताब्दी के अन्त में यहाँ एक लिंग स्थापित किया और उसे अपने नाम पर भद्रेश्वर कहा, जैसा चाम और ख्मेर परम्परा में राजा का नाम शिव के नाम से जोड़ा जाता था। वह पहला मन्दिर लकड़ी का था और जल गया। सातवीं शताब्दी में शम्भुवर्मन ने उसे फिर बनवाया, और तब से चाम पकी ईंटों से बनाने लगे, इतनी सटी हुई कि जोड़ मुश्किल से दिखते हैं। पहाड़ियों से घिरी घाटी में सत्तर से अधिक मन्दिर बने, और ऊपर महापर्वत खड़ा है।
021969 की बमबारी
आगे की शताब्दियों में चम्पा ने अपनी उत्तरी भूमि वियतनामियों के हाथ खोई और घाटी सूनी हो गई। फ्रांसीसी विद्वानों ने 1898 से इसे साफ कर इसका अभिलेखन किया, और आँरी पारमान्तिए ने मन्दिर-समूहों को A से N तक क्रमांक दिए। सबसे बड़ा आघात वियतनाम युद्ध में लगा: घाटी में वियतकांग लड़ाके छिपे थे, और अगस्त 1969 की अमेरिकी बमबारी ने महान मन्दिर A1 सहित बहुत कुछ नष्ट कर दिया। आज बीस से कम संरचनाएँ ठीक अवस्था में हैं। 1999 में यह यूनेस्को सूची में आया।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- चौथी शताब्दी का अन्तभद्रवर्मन प्रथम ने लकड़ी के मन्दिर में भद्रेश्वर लिंग स्थापित किया।
- 1898फ्रांसीसी विद्वानों ने मन्दिरों की सफाई और अभिलेखन आरम्भ किया।
- अगस्त 1969अमेरिकी बमबारी से मन्दिर A1 सहित अधिकांश परिसर नष्ट हुआ।
- 1999यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल।
होई आन से लगभग 40 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम। चिह्नित रास्तों पर ही चलें; घाटी के कुछ ही भागों से न फटे बम हटाए गए हैं।




