01ब्रह्मगुप्त का नगर
ब्रह्मगुप्त स्वयं बताते हैं कि उन्होंने ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त शक 550, अर्थात 628 ई., में तीस वर्ष की आयु में चाप वंश के व्याघ्रमुख के राज्यकाल में लिखा। परम्परा उन्हें भिल्लमालाचार्य, भिल्लमाल के आचार्य, कहती है। उस ग्रन्थ में उन्होंने शून्य के साथ और धन-ऋण, अर्थात धनात्मक-ऋणात्मक संख्याओं के साथ गणना के नियम दिए, और ऐसे समीकरण हल किए जिन्हें यूनानियों ने कभी छुआ नहीं; आठवीं शताब्दी में बग़दाद में अरबी में अनूदित होकर यह ग्रन्थ भारतीय ज्योतिष को पश्चिम ले गया। लगभग 641 में ह्वेनसांग इधर से गुज़रे और ‘कियु-चे-लो’, अर्थात गुर्जर देश, की राजधानी का वर्णन किया, जहाँ एक युवा क्षत्रिय राजा था। शिशुपालवध के रचयिता कवि माघ भी श्रीमाल के पुत्र माने जाते हैं।
02आक्रमण और बाद का नगर
लगभग 725 ई. में सिन्ध के अरब शासक जुनैद ने जब पूर्व की ओर धावे भेजे, तो अल-बलाज़ुरी आक्रान्त स्थानों में अल-बैलमान, अर्थात भीनमाल, गिनाता है। उसके बाद गुर्जर-प्रतिहारों और जालोर के चाहमानों ने यह प्रदेश रखा। श्रीमाली ब्राह्मण और श्रीमाल तथा पोरवाल जैन व्यापारी परिवार अपना नाम इसी नगर से लेते हैं, और यहाँ के पुराने मन्दिरों में जगत्स्वामी सूर्य मन्दिर, वराह श्याम मन्दिर और नीलकण्ठ महादेव मन्दिर हैं।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- 628 ई. (शक 550)ब्रह्मगुप्त भिल्लमाल में ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त पूरा करते हैं।
- लगभग 641ह्वेनसांग गुर्जर राजधानी आते हैं।
- लगभग 725सिन्ध से जुनैद के धावे भीनमाल तक पहुँचते हैं (अल-बलाज़ुरी)।
भीनमाल जोधपुर–भीलड़ी रेलमार्ग पर, जालोर से लगभग 70 किमी दक्षिण-पश्चिम में है।






