01तीन धाराएँ
मेघालय की पहाड़ियों से यहाँ तीन धाराएँ उतरती हैं, सन्ध्या, ललिता और कान्ता, और मिलकर वशिष्ठ नदी बनाती हैं। कालिका पुराण कामरूप में वशिष्ठ की तपस्या का उल्लेख करता है, और घाटी के लोग मानते हैं कि रघुवंश के गुरु यहीं रहे; धारा के ऊपर एक गुफा उनका आसन बताई जाती है। यात्री धाराओं के संगम पर स्नान करते हैं और पितरों को पिण्ड देते हैं।
02राजेश्वर सिंह का मन्दिर
1751 से 1769 तक शासन करने वाले राजेश्वर सिंह ने पत्थर का शिव मन्दिर बनवाया और उसे भूमि और सेवक दिए। पुराने वृक्षों के नीचे के परिसर में छोटे मन्दिर और साधुओं की समाधियाँ हैं, और धारा सीढ़ियों के पास से बहती है। शिवरात्रि पर बड़ा मेला लगता है, और वर्ष भर परिवार वन-भोज और संगम पर श्राद्ध कर्म के लिए आते हैं। पेड़ों पर बन्दर रहते हैं, और मन्दिर के ठीक पीछे गर्भांगा पहाड़ियों का वन आरम्भ होता है।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- 1764राजेश्वर सिंह आश्रम में शिव मन्दिर बनवाते हैं।
दक्षिण-पूर्वी गुवाहाटी के बसिष्ठ में, रेलवे स्टेशन से लगभग 12 किमी।




