01‘क्या आपने ईश्वर को देखा है?’
नरेन्द्रनाथ का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के छात्र थे, पश्चिमी दर्शन पढ़ते और सुरीला गाते थे। हर साधु से वे एक ही प्रश्न पूछते, क्या आपने ईश्वर को देखा है? 1881 में दक्षिणेश्वर में श्रीरामकृष्ण ने उत्तर दिया कि हाँ, जैसे तुम्हें देख रहा हूँ वैसे ही, और तुम्हें भी दिखा सकता हूँ। फिर पाँच वर्ष संदेह और परख चली। 1886 में गुरु के जाने के बाद युवा शिष्यों ने संन्यास लिया और नरेन्द्र वर्षों पैदल भारत घूमे। दिसम्बर 1892 में कन्याकुमारी के समुद्र में शिला पर तीन दिन ध्यान करके उन्होंने पश्चिम जाने का निश्चय किया।
02शिकागो, 11 सितम्बर 1893
विश्व धर्म महासभा के उद्घाटन पर वे बिना लिखे भाषण के उठे और बोले, ‘अमेरिका की बहनो और भाइयो’, और सभागार दो मिनट तक खड़ा होकर तालियाँ बजाता रहा। उन्होंने उस धर्म की बात की जिसने संसार को सहिष्णुता और स्वीकार सिखाया और हर देश के सताए हुओं को शरण दी। अमेरिकी अख़बारों ने उन्हें रातोंरात प्रसिद्ध कर दिया। लगभग चार वर्ष अमेरिका और इंग्लैंड में वेदान्त और राजयोग सिखाकर वे जनवरी 1897 में लौटे, और कोलम्बो से मद्रास तक उनका नायक की तरह स्वागत हुआ।

03मिशन और बेलूड़
1 मई 1897 को उन्होंने कोलकाता में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जिसमें संन्यासी ग़रीबों, रोगियों और अकाल-पीड़ितों की सेवा को मनुष्य में शिव की पूजा मानकर करते हैं। गंगा के पश्चिमी तट पर बेलूड़ मठ की प्रतिष्ठा दिसम्बर 1898 में संघ के केन्द्र के रूप में हुई। उनके व्याख्यानों ने, विशेषकर ‘कोलम्बो से अल्मोड़ा तक’ के भाषणों ने, राष्ट्रवादियों की एक पूरी पीढ़ी को जगाया। 4 जुलाई 1902 को बेलूड़ मठ में उनका देहावसान हुआ। भारत उनका जन्मदिन, 12 जनवरी, राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाता है।
“अमेरिका की बहनो और भाइयो।”
Swami Vivekananda, World’s Parliament of Religions, Chicago, 11 September 1893

