01कुम्भकोणम से कैम्ब्रिज
उनका जन्म 22 दिसम्बर 1887 को ईरोड में नानी के घर हुआ, और बचपन कुम्भकोणम में बीता। पन्द्रह वर्ष की आयु में उन्होंने जी. एस. कार की सिनॉप्सिस उधार ली, लगभग पाँच हज़ार परिणामों की सूखी सूची, और उसी से स्वयं सीखा, अपनी खोजें नोटबुक में लिखते हुए। गणित के सिवा कुछ न पढ़ने के कारण वे कॉलेज में असफल हुए। 1912 में वे मद्रास पोर्ट ट्रस्ट में क्लर्क बने। 16 जनवरी 1913 को उन्होंने लगभग एक सौ बीस प्रमेयों के साथ हार्डी को पत्र लिखा। हार्डी ने बाद में कहा कि उनमें से कुछ ने उन्हें ‘पूरी तरह हरा दिया’ और वे सत्य होंगे, क्योंकि कोई उन्हें गढ़ने की कल्पना नहीं कर सकता। रामानुजन् 17 मार्च 1914 को इंग्लैण्ड के लिए रवाना हुए।
02इंग्लैण्ड के पाँच वर्ष
हार्डी के साथ उन्होंने विभाजन फलन p(n), अर्थात् n को योग के रूप में लिखने के तरीकों की संख्या, का ऐसा सूत्र खोजा जो p(200) तक का ठीक मान दे देता है। 1918 में वे रॉयल सोसाइटी के फ़ेलो चुने गए और ट्रिनिटी कॉलेज के फ़ेलो भी, जो पद पाने वाले वे पहले भारतीय थे। ठण्ड, युद्धकाल का भोजन और रोग ने उन्हें तोड़ दिया। अस्पताल में मिलने आए हार्डी ने कहा कि उनकी टैक्सी का नम्बर 1729 नीरस है; रामानुजन् ने उत्तर दिया कि यह वह सबसे छोटी संख्या है जो दो घनों के योग के रूप में दो तरह से लिखी जा सकती है। 1919 में वे घर लौटे और 26 अप्रैल 1920 को चल बसे। वे कहते थे कि उनकी कुलदेवी, नामक्कल की नामगिरि, स्वप्न में उन्हें सूत्र देती थीं। भारत 22 दिसम्बर को राष्ट्रीय गणित दिवस मनाता है।
