01जोड़ासाँको से स्टॉकहोम
7 मई 1861 को कोलकाता के जोड़ासाँको में ठाकुर परिवार के घर उनका जन्म हुआ, जहाँ संगीत और नाटक होते थे और पिता नित्य उपनिषद पढ़ते थे। स्कूल उन्हें अच्छा नहीं लगा, सो घर पर ही पढ़े। आठ वर्ष की आयु में कविता लिखने लगे और सोलह में उनकी कविताएँ छपने लगीं। वर्षों उन्होंने पद्मा तट पर शिलाइदह की पारिवारिक ज़मींदारी सँभाली, और नदी किनारे के गाँव उनकी कहानियों में भरे हैं। उनके बांग्ला गीतों का उन्हीं का किया अंग्रेज़ी गद्यानुवाद ‘गीतांजलि’ 1912 में लंदन में छपा, और 13 नवम्बर 1913 को वे साहित्य का नोबेल पाने वाले पहले एशियाई घोषित हुए।
02शान्तिनिकेतन और राष्ट्रगान
1901 में उन्होंने शान्तिनिकेतन में, जहाँ पिता ने आश्रम बनाया था, खुले आकाश के नीचे विद्यालय खोला, और 1921 में उसे विश्वभारती विश्वविद्यालय बनाया। 1905 के बंग-भंग पर उन्होंने कोलकाता में जुलूस निकाले, हिंदुओं और मुसलमानों दोनों को राखी बाँधी, और ‘आमार सोनार बांग्ला’ लिखा। ‘जन गण मन’ पहली बार 27 दिसम्बर 1911 को कलकत्ता कांग्रेस में गाया गया; संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को इसे भारत का राष्ट्रगान स्वीकार किया। जलियाँवाला बाग़ हत्याकाण्ड के बाद मई 1919 में वायसराय को पत्र लिखकर उन्होंने ‘सर’ की उपाधि लौटा दी। 7 अगस्त 1941 को जोड़ासाँको में उनका देहावसान हुआ।

“जहाँ मन भयमुक्त हो और सिर ऊँचा हो; जहाँ ज्ञान मुक्त हो।”
Rabindranath Tagore, Gitanjali (Song Offerings, 1912), 35