01नाम: आज़ाद
उनका जन्म अलीराजपुर रियासत के भाबरा (आज चंद्रशेखर आज़ाद नगर, मध्य प्रदेश) में हुआ और वे संस्कृत पढ़ने काशी गए। 1921 में असहयोग आंदोलन में वे गिरफ़्तार हुए। मजिस्ट्रेट के सामने उन्होंने अपना नाम ‘आज़ाद’, पिता का नाम ‘स्वतंत्रता’ और घर ‘जेलख़ाना’ बताया, और पंद्रह कोड़ों की सज़ा पाई; हर कोड़े पर वे ‘भारत माता की जय’ बोलते रहे। 1922 में असहयोग वापस लिए जाने पर वे राम प्रसाद बिस्मिल के हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन में आए और 9 अगस्त 1925 की काकोरी ट्रेन कार्रवाई में भाग लिया। काकोरी के आरोपियों में केवल वही कभी पकड़े नहीं गए।
02अल्फ़्रेड पार्क
1928 से हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के प्रधान सेनापति के रूप में उन्होंने उसकी कार्रवाइयों का संचालन किया, सॉन्डर्स कांड के बाद भगत सिंह और राजगुरु को निकलने में आड़ दी, और 23 दिसंबर 1929 को दिल्ली के पास वायसराय की ट्रेन के नीचे बम की योजना बनाई। 27 फ़रवरी 1931 को मुख़बिरी पर पुलिस ने इलाहाबाद के अल्फ़्रेड पार्क में उन्हें घेर लिया। एक पेड़ की आड़ से वे लड़े, कई पुलिसवालों को घायल किया, और अंतिम गोली स्वयं को मार ली। वह पार्क आज चंद्रशेखर आज़ाद पार्क है और उनकी पिस्तौल इलाहाबाद संग्रहालय में रखी है।

